Interim Budget 2024 : डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने से एनपीएस में बढ़ेगी लोगों की दिलचस्पी

Interim Budget 2024 : अभी NPS में कंट्रिब्यूशन के मामले में प्राइवेट एंप्लॉयीज के लिए 10 फीसदी की लिमिट तय है। 10 फीसदी का यह कंट्रिब्यूश बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता पर आधारित होता है। PFRDA का कहना है कि इसे बढ़ाकर 12 फीसदी करने की जरूरत है। सरकारी एंप्लॉयीज के मामले में यह लिमिट 14 फीसदी है

अपडेटेड Jan 10, 2024 पर 8:24 PM
Interim Budget 2024 : अभी एक प्राइवेट एंप्लॉयी अपनी सैलरी का 10 फीसदी (बेसिक पे और डियरनेस अलाउन्स) एनपीएस में कंट्रिब्यूट कर सेक्शन 80CCD(1) के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है। सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स के लिए यह लिमिट 20 फीसदी है। इसका मतलब है कि वे अपनी ग्रॉस टोटल इनकम का 20 फीसदी एनपीएस में कंट्रिब्यूट कर सकते हैं।

Interim Budget 2024 : पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से प्राइवेट सेक्टर एंप्लॉयीज के NPS कंट्रिब्यूशन के टैक्स के नियमों को उदार बनाने की गुजारिश की है। PFRDA के प्रमुख दीपक मोहंती ने 5 जनवरी को कहा कि NPS में प्राइवेट एंप्लॉयीज का कंट्रिब्यूशन EPF में कंट्रिब्यूशन की 12 फीसदी लिमिट जितनी होनी चाहिए। हालांकि, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में किसी बड़े ऐलान की संभावना से इनका किया है। उन्होंने कहा है कि यह वोट-ऑन-अकाउंट होगा। इसके बावजूद कई जानकारों का मानना है कि वित्तमंत्री अंतरिम बजट में टैक्स के मामले में कुछ राहत दे सकती हैं। वित्तमंत्री ने 7 दिसंबर को CII के एक कार्यक्रम में कहा था कि बड़े ऐलान के लिए जुलाई तक इंतजार करना होगा, जब लोकसभा चुनावों के बाद नई सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करेगी।

अभी 10 फीसदी की लिमिट

अभी NPS में कंट्रिब्यूशन के मामले में प्राइवेट एंप्लॉयीज के लिए 10 फीसदी की लिमिट तय है। 10 फीसदी का यह कंट्रिब्यूश बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता पर आधारित होता है। PFRDA का कहना है कि इसे बढ़ाकर 12 फीसदी करने की जरूरत है। सरकारी एंप्लॉयीज के मामले में यह लिमिट 14 फीसदी है। पीएफआरडीए एनपीएस में कंट्रिब्यूशन पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट को नई टैक्स रीजीम के लिए भी लागू करने की सलाह दी है। अभी एनपीएस में कंट्रिब्यूशन पर टैक्स बेनेफिट सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में मिलता है।


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बढ़ रही एनपीएस में दिलचस्पी

एनपीएस में लोगों की दिलचस्पी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि इसका मैनेजमेंट कॉस्ट कम है और इसे सरकार का सपोर्ट हासिल है। टैक्स बेनेफिट, अट्रैक्टिव रिटर्न और कम मैनेजमेंट खर्च की वजह से यह आपके रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में जरूर शामिल होना चाहिए।

प्राइवेट एंप्लॉयीज के लिए लिमिट बढ़नी चाहिए

अभी एक प्राइवेट एंप्लॉयी अपनी सैलरी का 10 फीसदी (बेसिक पे और डियरनेस अलाउन्स) एनपीएस में कंट्रिब्यूट कर सेक्शन 80CCD(1) के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है। सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स के लिए यह लिमिट 20 फीसदी है। इसका मतलब है कि वे अपनी ग्रॉस टोटल इनकम का 20 फीसदी एनपीएस में कंट्रिब्यूट कर सकते हैं। लेकिन, यह टैक्स ब्रैकेट इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी की 1.5 लाख रुपये की लिमिट के तहत आता है। केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज भी NPS टियर-II (ऑप्शनल, इनवेस्टमेंट अकाउंट) में कंट्रिब्यूशन पर इस सेक्शन के तहत डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। उन्हें तीन साल की लॉक-इन की शर्त पूरी करनी होगी।

50,000 रुपये का अतिरिक्त डिडक्शन

एनपीएस में निवेश पर सेक्शन 80CCD(1) के अलावा सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये का डिडक्शन मिलता है। इस तरह दोनों सेक्शन को मिला देने पर आपकी कुल टैक्स सेविंग्स 2 लाख रुपये तक हो जाती है। यह ध्यान देने वाली बात है कि दोनों सेक्शन में मिलने वाला डिडक्शन सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में मिलता है।

टैक्स स्पैनर डॉट कॉम के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक ने कहा, "मिडिल और हाई इनकम वर्ग में आने वाले लोगों के रिटाटरमेंट कॉर्पस बनाने के लिए यह डिडक्शन काफी नहीं है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। एनपीएस का रिटर्न अच्छा है लेकिन हाई इनफ्लेशन और बढ़ती औसत उम्र को देखते हुए लोगों को ज्यादा निवेश के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। इसके अलावा सेक्शन 80सी की लिमिट अक्सर दूसरे तरह के निवेश पर खत्म हो जाती है और एंप्लॉयर्स के लिए सेक्शन 80CCD(2) के तहत एनपीएस ऑफर करना अनिवार्य नहीं है।"

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