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Budget 2023: क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर होगा सरकार का फोकस, क्या इस सेक्टर के क्वालिटी स्टॉक्स में आएगी तेजी?

पिछले एक साल में BSE पावर इंडेक्स में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है जबकि इस दौरान बेंचमार्क BSE सेंसेक्स में 5 फीसदी की बढ़त हुई है। पावर सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन की वजह बिजली की बढ़ती मांग है। इस सेक्टर के तहत ग्रीन एनर्जी से जुड़े स्टॉक बेहतर प्रदर्शन जारी रख सकते हैं

Edited By: Shubham Thakurअपडेटेड Jan 29, 2023 पर 5:15 PM
Budget 2023: क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर होगा सरकार का फोकस, क्या इस सेक्टर के क्वालिटी स्टॉक्स में आएगी तेजी?
डोमेस्टिक पावर डिमांड में लगातार बढ़ोतरी, एनर्जी ट्रांजिशन में मोमेंटम और सरकार की पॉलिसी इनिशिएटिव के चलते पावर सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स ने 2022 में अच्छा प्रदर्शन किया है।

डोमेस्टिक पावर डिमांड में लगातार बढ़ोतरी, एनर्जी ट्रांजिशन में मोमेंटम और सरकार की पॉलिसी इनिशिएटिव के चलते पावर सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स ने 2022 में अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में BSE पावर इंडेक्स में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है जबकि इस दौरान बेंचमार्क BSE सेंसेक्स में 5 फीसदी की बढ़त हुई है। पावर सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन की वजह बिजली की बढ़ती मांग है। भारतीय अर्थव्यवस्था घरेलू खपत और ग्रोथ पर फोकस करके वैश्विक विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सेक्टर के तहत ग्रीन एनर्जी पर फोकस करने वाले स्टॉक बेहतर प्रदर्शन करना जारी रख सकते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट 2023-24 पेश करने वाली हैं। इसमें पावर सेक्टर के लिए भी कई बड़े ऐलान होने की उम्मीद है, जिसमें कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन-स्टोरेज से जुड़े बड़े ऐलान संभव है। वहीं नेशनल ग्रिड जैसी बैटरी स्टोरेज के लिए भी ऐलान हो सकता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

IIFL सिक्योरिटीज के मुताबिक, कोविड-19 के बाद लो बेस और नॉर्मलाइजेशन के कारण भारत में सालाना आधार पर बिजली की मांग में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, अगले 12 महीनों में महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे राज्यों के नेतृत्व में ग्रोथ रेट 5-7 प्रतिशत होने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स ने कहा कि इसकी ग्रोथ को स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्डों की फाइनेंशियल हेल्थ में सुधार से मदद मिलेगी।

BOB कैपिटल मार्केट्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली वितरण कंपनियों (discoms) द्वारा बिजली उत्पादकों पर कुल बकाया राशि दिसंबर 2022 तक लगभग आधी होकर 675 अरब रुपये हो गई, जबकि दिसंबर 2021 में यह 1,210 अरब रुपये थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिस्कॉम के कुल बकाया में भारी कमी मुख्य रूप से सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के कारण है, जैसे लेट पेमेंट सरचार्ज नियमों को लागू करना और समान मासिक किस्तों की सुविधा प्रदान करना।

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