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दिल्ली के प्रदूषण से खतरे में हुमायूं का मकबरा! IIT स्टडी में सामने आया कि जहरीली हवा से बलुआ पत्थर पर जम रही काली परत

Air pollution in Delhi: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की (IIT रुड़की) और IIT कानपुर की UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट की जॉइंट स्टडी के मुताबिक, एयर पॉल्यूशन से दिल्ली में हुमायूं के मकबरे की हालत लगातार खराब होती जा रही है। प्रदूषण की वजह से इसकी सैंडस्टोन सतहों पर पॉल्यूटेंट से भरपूर काली परतें बन रही हैं

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 03, 2026 पर 9:28 AM
दिल्ली के प्रदूषण से खतरे में हुमायूं का मकबरा! IIT स्टडी में सामने आया कि जहरीली हवा से बलुआ पत्थर पर जम रही काली परत
Air pollution in Delhi: आईआईटी की स्टडी में सामने आया है कि जहरीली हवा से बलुआ पत्थर पर काली परत जम रही है

Air pollution in Delhi: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की (IIT रुड़की) और IIT कानपुर की एक जॉइंट स्टडी से पता चला है कि वायु प्रदूषण दिल्ली में UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट हुमायूं के मकबरे में इस्तेमाल किए गए बलुआ पत्थर के खराब होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आर्किटेक्चरल हेरिटेज' में प्रकाशित स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, मकबरे के अलग-अलग हिस्सों से इकट्ठा किए गए काली परत (black crust) के सैंपल के केमिकल कंपोजिशन, मिनरल कंटेंट और माइक्रोस्ट्रक्चर का विश्लेषण करने के लिए लैब तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

इस दौरान रिसर्च टीम ने पाया कि काली परत मुख्य रूप से जिप्सम से बनी है, जो प्रदूषित हवा में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड की कैल्शियम-युक्त धूल और नमी के साथ प्रतिक्रिया से बनती है। स्टडी से पता चलता है कि जिप्सम की परत कालिख, धूल और धातु के बारीक कणों (जो गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों, सड़क की धूल, खेती के कचरे को जलाने और औद्योगिक प्रदूषण से आते हैं) को फंसा लेती है, जिससे धीरे-धीरे बलुआ पत्थर पर काली परत बन जाती है।

बारिश की वजह से हो रहा खराब?

यह देखा गया कि स्मारक के उन हिस्सों पर सबसे मोटी काली परत बनी जो बारिश से बचे हुए थे, जहां लंबे समय तक प्रदूषक जमा होते रहते हैं। जबकि ज्यादा खुले हिस्सों पर परतें अपेक्षाकृत पतली थीं क्योंकि बारिश प्राकृतिक रूप से कुछ प्रदूषकों को धो देती है। रिसर्चर्स के अनुसार, काली परत केवल सतह पर लगा दाग नहीं है। इस परत को बनाने वाली केमिकल प्रतिक्रियाएं धीरे-धीरे बलुआ पत्थर को कमजोर कर देती हैं, जिससे यह मौसम की मार और लंबे समय तक होने वाले नुकसान के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है।

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