Budget 2024: हर साल वित्त मंत्री 1 फरवरी को बजट पेश करते हैं। इस साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2024 को बजट पेश करेंगी। यह उनका छठा बजट होगा। बजट भाषण के दौरान नए टर्म सुनने को मिलते हैं, जिसके बारे में जानने के लिए लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा हो जाती है। ऐसा ही एक शब्द है 'डायरेक्ट टैक्स'। यहां डायरेक्ट टैक्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है:
डायरेक्ट टैक्स वह टैक्स होता है, जो लोगों या संस्थानों द्वारा अपनी कमाई पर सीधे तौर पर सरकार को दिया जाता है। आसान शब्दों में कहें, तो अगर किसी ने पैसे कमाए हैं और उसकी कमाई टैक्स के दायरे में आती है, तो उसे टैक्स देना होगा।
डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स के अलावा गिफ्ट टैक्स, वेल्थ टैक्स, कैपिटल गेन्स टैक्स आदि शामिल हैं। अगर कोई व्यक्ति कमाई करता है और वह टैक्स के दायरे में है, तो उसे नियमों के हिसाब से ये सब टैक्स देने होंगे। कंपनियों से जुड़ा कॉरपोरेट टैक्स इसी दायरे में आता है। कमाई करने वाले शख्स या कंपनी को डायरेक्ट टैक्स देना पड़ता है।
डायरेक्ट टैक्स के तहत मौजूद कैटगरी
भारत में मौजूद डायरेक्ट टैक्स की सूची यहां दी जा रही है:
इनकम टैक्स, इनकम पर लगने वाला टैक्स है। भारत सरकार ने इस टैक्स के लिए कई स्लैब तय किए हैं, जिसके तहत इसका भुगतान किया जाता है।
यह डायरेक्ट टैक्स का एक ही रूप है, जो संपत्तियों या निवेश की बिक्री पर दिया जाता है।
शेयरहोल्डर्स के अलावा घरेलू कंपनियों को कॉपोरेट टैक्स देना पड़ता है। भारत में मौजूद उन विदेशी कंपनियों को भी यह टैक्स देना पड़ता है, जो यहां रेवेन्यू हासिल करते हैं। संपत्तियों की बिक्री, टेक्निकल सर्विसेज फीस, डिविडेंड, रॉयल्टी आदि पर भी टैक्स लगता है।
यह ऐसा टैक्स है, जो प्रॉपर्टी ओनरशिप और मार्केट वैल्यू पर लगता है। अगर किसी शख्स के पास रियल एस्टेट का मालिकाना हक है, तो उसे वेल्थ टैक्स देना होगा, चाहे उस प्रॉपर्टी से पैसे हासिल हो रहे हों या नहीं।
एस्टेट टैक्स को इनहेरिटेंस टैक्स के तौर पर भी जाना जाता है और इसका भुगतान उस संपत्ति या रकम की वैल्यू के आधार पर होता है, जो कोई शख्स अपनी मौत के बाद छोड़ता है।