Union Budget 2023: इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान है। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री ने शुक्रवार (6 जनवरी) को यह अनुमान व्यक्त किया है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ 8.7 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ने कहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में इंडिया की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 15.4 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 19.5 फीसदी थी। इस फाइनेंशियल ईयर में ग्रॉस वैल्यू ऐडेड 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 8.1 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ने कहा है, "रियल जीडीपी इस फाइनेंशियल ईयर में 157.60 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के दौरान जीडीपी का प्रोविजनल अनुमान 147.36 लाख करोड़ रुपये है।"
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ घटने का अनुमान
मिनिस्ट्री ने कहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में रियल जीडीपी की ग्रोथ 7 फीसदी रह सकती है। जीवीए के लिहाज से सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 13.7 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 11.1 फीसदी थी। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उत्पादन की ग्रोथ घटने का अनुमान है। इसके इस फाइनेंशियल ईयर में घटकर 1.6 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 9.9 फीसदी थी।
नेट नेशनल इनकम ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान
इस फाइनेंशियल ईयर में प्राइवेट कंजम्प्शन की ग्रोथ 7.7 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 7.9 फीसदी थी। इस फाइनेंशियल ईयर में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन की ग्रोथ 11.5 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह 15.8 फीसदी थी। ग्रॉस नेशनल इनकम और नेट नेशनल इनकम की ग्रोथ इस फाइनेंशियल ईयर में 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर में 8.8 फीसदी था। इस फाइनेंशियल ईयर में प्रति व्यक्ति आय की ग्रोथ 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ग्रथ 7.6 फीसदी थी।
अमेरिका और यूरोप पर मंडरा रहा मंदी का खतरा
इस फाइनेंशियल ईयर में 7 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ बहुत अच्छी कही जाएगी। दुनिया में अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप जैसे देशों पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में इंडियन इकोनॉमी तेज रफ्तार से बढ़ रही है। यूनियन बजट 2023 से पहले ग्रोथ का यह अनुमान सरकार के लिए भी अच्छी खबर है। माना जा रहा है कि यूनियन बजट 2023 में सरकार का फोकस इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने वाले उपायों पर होगा।
फाइनेंशियल ईयर 2020-2021 में कोरोना की महामारी की वजह से जीडीपी में गिरावट आई थी। तब लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थी। इसका सीधा असर इकोनॉमी पर पड़ा था।