Budget Expectation 2022: 1 फरवरी 2022 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। बजट से सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह ऐसा हो जो कोविड-19 की तीसरी लहर के समय अर्थव्यवस्था को बूस्ट दे। यहां आपको बजट से जुड़ी पांच परंपराओं के बारे में बता रहे हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बदली गई हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 परंपराओं के बारे में...
1 बदली बजट पेश करनेकी तारीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने साल 2017 में बजट पेश करने की तारीख को बदल था। साल 2017 से पहले तक बजट फरवरी महीने के आखिरी दिन पेश होता था लेकिन उन्होंने इसे फरवरी की पहली तारीख 1 फरवरी को पेश करना शुरू कर दिया। इसका कारण था कि बजट से जुड़ी हुई सभी प्रक्रियाओं को नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होने से पहले खत्म किया जा सके।
2 खत्म हुआ अलग रेल बजट पेश करना
साल 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ही रेल बजट अलग से पेश करने की परंपरा को बदल दिया। रेल बजट को बजट के हिस्से के रूप में पेश किया जाने लगा। इससे पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था।
देश के पहले वित्त मंत्री आर सी के एस चेट्टी जब 1947 मेंआजादी के बाद का पहला बजट पेश करने आए तो वह चमड़े के एक ब्रीफकेस में बजट लेकर पहुंचे। तब से इस परंपरा का पालन हो रहा था लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदल और 5 जुलाई 2019 को लाल कपड़े के एक बस्ते में बजट लेकर संसद भवन पहुंची।
4 अब प्रिंट नहीं होता आम बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट प्रक्रिया से जुड़ा एक और नियम बदल दिया। हालांकि, ये बदलाव कोरोना महामारी के कारण करना पड़ा। कोविड प्रोटोकॉल के चलते बीते साल 2021 में बजट को प्रिंट नहीं कराया गया। सिर्फ कुछ ही कॉपी सांसदों के लिए छापी गई। इस बार भी ऐसा ही होने वाला है।
मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में योजना आयोग को खत्म करके नीति आयोग का गठन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय से चली आ रही पंचवर्षीय योजनाओं को को बंद कर दिया। साल 2017 में सभी पंचवर्षीय योजनाएं खत्म हो गई थी।