Budget 2023: इस बार किसी नई कंपनी के निजीकरण का नहीं होगा ऐलान, जानें बजट को लेकर सरकार का प्लान
Union Budget 2023-24: बजट में इस बार विनिवेश पर फोकस कम हो सकता है। इसके पीछे प्रमुख कारण सरकार के पुराने विनिवेश लक्ष्यों का पूरा न हो पाना है। शेयर बाजार में अस्थिरता भरे माहौल के चलते LIC जैसे बड़ा नाम भी पिछले साल सरकार को अधिक पैसा नहीं दिला सका था। वित्त वर्ष 2023 में भी सरकार का विनिवेश लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है
Budget 2023: वित्त वर्ष 2023 में भी सरकार का विनिवेश लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है
Union Budget 2023-24:यूनियन बजट पेश होने के महीनों पहले से ही स्टॉक मार्केट के जानकार और एनालिस्ट्स इसमें होने वाली संभावित ऐलानों को लेकर आकलन में जुट जाते हैं। इसके जरिए उनका फोकस उन क्षेत्रों और कंपनियों का चयन करना होता है, जहां बजट के संभावित ऐलानों के आधार पर पैसा बनाया जा सकता है। हालांकि इस बार उनके फोकस वाले क्षेत्रों में विनिवेश या डिसइनवेस्टमेंट (Disinvestment) शामिल नहीं है। इसके पीछे प्रमुख कारण सरकार के पुराने विनिवेश लक्ष्यों का पूरा न हो पाना है। शेयर बाजार में अस्थिरता भरे माहौल के चलते पिछले साल लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) जैसे बड़ा नाम भी अपने IPO के जरिए सरकार को अधिक पैसा नहीं दिला सका था। वित्त वर्ष 2023 में भी सरकार का विनिवेश लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक मजबूरियों को देखते हुए, सरकार इस साल यूनियन बजट 2023-24 में विनिवेश को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं करेगी। बल्कि इसकी जगह वह विनिवेश के पिछले लक्ष्यों से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने और इसे पूरा करने पर फोकस करेगी।
सरकार की संभावित विनिवेश लिस्ट में बीपीसीएल, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Concor), राष्ट्रीय इस्तापत निमग लिमिटेड, बीईएमएल, IDBI बैंक, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान जिंक में बची आंशिक हिस्सेदारी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा NMDC का स्टील प्लांट और सेल के स्टील प्लांट जैसे अन्य छोटी-छोटी संपत्तियों की बिक्री भी शामिल हो सकती है।
जेफरीज इंडिया के एनालिस्ट्स ने एक नोट में कहा, "सरकार की ओर से दो सरकारी बैंक, सरकारी ऑयल कंपनी BPCL, कुछ स्टील प्लांट्स और इंफ्रा एसेट्स (एयरपोर्ट्स, रेलवे स्टेशन आदि) के निजीकरण के प्रस्ताव में साल 2022 के दौरान सीमित तरक्की देखी गई और 2023 में भी इसमें कुछ खास तेजी आने की उम्मीद नहीं है।"
नोट में कहा गया है, "कुछ सरकारी यूनिट्स की निजीकरण/विनिवेश प्रक्रिया पहले से ही आगे चल रही है और उस पर कोई विवाद भी नहीं है। इन यूनिट्स के अलावा सिर्फ कॉनकोर, IDBI बैंक और शिपिंग कॉरपोरेशन में कुछ तरक्की देखने को मिल सकती है, वह इस साल की पहली छमाही तक ही।"
हालांकि, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट्स का कहना है कि एक कमजोर दशक के बावजूद, सरकारी कंपनियों के लिए हालात अब बेहतर होते दिख रहे हैं। उन्होंने सरकारी कंपनियों के मुनाफे की ओर इशारा किया, जो हाल में धीरे-धीरे बढ़ा है। इसे नीचे दिए गए चार्ट में भी देखा जा सकता है-
यह चार्ट बताता है कि वित्त वर्ष 2018 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल मुनाफे में 16.8 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का था, जबकि प्राइवेट कंपनियां का हिस्सा उस समय 83.2 फीसदी था। हालांकि वित्त वर्ष 2022 में सरकार कंपनियों का कुल मुनाफे में हिस्सा बढ़कर 31.3 फीसदी पर पहुंच गया, जबकि प्राइवेट सेक्टर कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर 68.7 फीसदी पर आ गई।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "आने वाले वित्त वर्षों में, सरकारी कंपनियों का मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है। मुनाफे बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान सरकारी बैंकों का है, जिनकी बैलेंस-शीट बेहतर होती दिख रही है। पिछले 2 सालों से कमोडिटी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बने रहने से मेटल और ऑयल एड गैस सेक्टर की सरकारी कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ा है।"
विनिवेश सूची में शामिल कंपनियों पर एक नजर
सरकारी कंपनियां समूह में निवेशकों को आकर्षक लग सकती है। हालांकि इसके बावजूद वे विनिवेश सूची में शामिल कंपनियों के लिए बोली लगाने में बहुत दिलचस्पी नहीं ले रहे। यह इससे भी पता चलता है कि ये कंपनियां पिछले करीब 2 साल से बिक्री के लिए बाजार में है। BPCL में हिस्सेदारी बेचने का सरकार ने सबसे पहले 2019 में ऐलान किया था। इसके लिए बोली भी मंगाई गई थी। हालांकि ग्लोबल स्तर पर ऑयल की कीमतों में उछाल और कंपनी के बढ़ते घाटे के चलते निवेशकों ने इसमें बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद मई में इसकी बोली रद्द कर दी गई।
Concor के मामले में तस्वीर थोड़ी बेहतर दिख रही है और इसने हाल ही में दिसंबर तिमाही के दौरान मुनाफा भी दर्ज किया है। जेफरीज के मुताबिक यह एक कर्ज मुक्त कंपनी है और रेलवे लॉजिस्टिक के मामले में अग्रणी कंपनी है। ऐसे में इसका विनिवेश आसान हो सकता है। साथ ही कंपनी का कैश फ्लो भी हाल के सालों में मजबूत हुआ है।
IDBI Bank का निजीकरण थोड़ा जटिल रहा है। सरकार ने इसका हल अपनी कुछ हिस्सेदारी LIC को बेचकर निकाला। इससे तकनीकी रूप से IDBI बैंक को प्राइवेट बैंक होने का तमगा मिल गया, लेकिन बााजार इसे इस नजर से नहीं देखता है। बैंक ने अपनी बैलेंस-शीट को साफ किया है और हाल ही में इसने 5 सालों के बाद वित्त वर्ष 2022 में मुनाफा दर्ज किया था। इसके चलते निवेशकों ने अब इसमें सरकार की हिस्सेदारी खरीदने को लेकर दिलचस्पी दिखाना शुरू किया है।
BEML के शेयर पिछले एक साल में 15 फीसदी गिरे है। कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 20 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। विनिवेश के हिसाब से इसकी संभावनाएं मजबूत नहीं दिख रही हैं। शिपिंग कॉरपोरेशन का मुनाफा भी पिछले साल के मुकाबले आधा हुआ है और इसका रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त पड़ा है।