यूनियन बजट 2023 : इलाज पर बढ़ते खर्च ने लोगों के लिए मुश्किल मुश्किल खड़ी कर दी है। हेल्थ सर्विसेज का इनफ्लेशन रेट रिटेल इनफ्लेशन रेट से ज्यादा है। इस वजह से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम भी बढ़ा है। वित्त मंत्री यूनियन बजट (Budget 2023) में इलाज के बढ़ते खर्च से लोगों के लिए राहत का ऐलान कर सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट 2023 में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। इससे टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।
आबादी के बड़े हिस्से के पास नहीं है हेल्थ पॉलिसी
इंडिया में आबादी के बहुत कम हिस्से के पास हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है। इसलिए ज्यादातर लोगों को इलाज का खर्च अपनी जेब से करना पड़ता है। कोरोना की महामारी के बाद हेल्थकेयर पर लोगों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसका काफी असर मिडिल क्लास परिवारों के बजट पर पड़ा है। बजट उनके घावों पर मरहम लगाने का काम कर सकता है। अभी सेक्शन 80डी के तहत 60 साल की उम्र का व्यक्ति हेल्थ पॉलिसी के प्रीमिमय पर सालाना 25,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिडक्शन की लिमिट 50,000 रुपये है।
सेक्शन 80डी की लिमिट बढ़ाने की जरूरत
ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर पंकज मठपाल ने कहा, "ऐसे देश में जहां इलाज कराना पूरी तरह से फ्री नहीं है, वहां सरकार को बगैर किसी लिमिट के मेडिकल खर्च पर 100 फीसदी डिडक्शन की इजाजत देनी चाहिए।" इंडिया में हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम ज्यादा होने की एक वजह यह है कि अभी हेल्थ पॉलिसी ज्यादा लोगों के पास नहीं है। अगर यूनियन बजट 2023 में हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ा दी जाती है तो इससे इंश्योरेंस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इससे ज्यादा लोग हेल्थ पॉलिसी खरीदने में दिलचस्पी दिखाएंगे।
सीनियर सिटिजंस को राहत की ज्यादा जरूरत
सीनियर सिटिजंस पर प्रेशर ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि उनके लिए सेक्शन 80डी के तहत लिमिट सिर्फ 50,000 रुपये है। जब हेल्थ केयर पर होने वाला खर्च बहुत बढ़ गया है तो उनके लिए ज्यादा कवर वाली पॉलिसी लेना जरूरी हो गया है। ज्यादा कवर वाली पॉलिसी का प्रीमियम भी ज्यादा होता है। इसलिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन की 50,000 रुपये की सीमा बढ़ाने की जरूरत है।
प्रीमियम पर GST घटाने की जरूरत
अपनाधन फाइनेंशियल सर्विसेज की फाउंडर प्रीति जेंडे ने कहा, "अगर कोई सीनियर सिटिजन अपनी पत्नी के साथ पर्याप्त कवर वाली हेल्थ पॉलिसी लेना चाहता है तो उसका प्रीमियम 50,000 रुपये से ज्यादा हो जाता है। इसलिए फाइनेंस मिनिस्टर को इस लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करनी चाहिए।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को अभी हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। इसे घटाकर 5 फीसदी करने की जरूरत है।