Union Budget 2023 : हाउसिंग सेक्टर को मिल सकता है बूस्ट, अगर सरकार कर दे ये 5 ऐलान

Union Budget 2023 : कोविड-19 के दौरान भारी सुस्ती के बाद बीते साल हाउसिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली थी। हालांकि, 2023 में इसके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कम है। इसलिए, बजट की भूमिका खासी अहम हो गई है। Budget 2023 से बायर और सेलर दोनों के लिए कुछ ऐलान करके इस इंडस्ट्री को कुछ राहत दी जा सकती है

अपडेटेड Jan 12, 2023 पर 12:03 PM
रियल एस्टेट और होम लोन सेक्टर इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इसकी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी है

Union Budget 2023 : कोविड-19 के दौरान भारी सुस्ती के बाद बीते साल हाउसिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। हालांकि, 2023 में इसके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कम है। इसलिए, बजट की भूमिका खासी अहम हो गई है। Budget 2023 बायर और सेलर दोनों के लिए कुछ ऐलान करके इस इंडस्ट्री को कुछ राहत दे सकता है। Anarock Research के एक एनालिसिस में दावा किया गया था कि 2021 की तुलना में 2022 में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की सेल्स 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट एनालिस्ट अतुल मोंगा ने कहा रियल एस्टेट और होम लोन सेक्टर इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इसकी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी है, इसलिए लेंडर्स को आकर्षक ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध कराना चाहिए। इसके अलावा, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि बजट में संभवतः इन 5 ऐलान से बिजनेस को मदद मिल सकती है।

टैक्स एग्जम्प्शन


Tax exemption :  ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रियल एस्टेट और होम लोन इंडस्ट्रीज पर खासा असर होने का अनुमान है। बायर्स ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंतित हैं। सरकार को हाउसिंग लोन इंटरेस्ट पर टैक्स छूट की सीमा 5 लाख रुपये तक बढ़ानी चाहिए।

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होम लोन के नियमों में बदलाव

मॉर्टगेज फर्म आईएमजीसी के सीओओ अनुज शर्मा जोर देकर कहते हैं कि होम लोन को ज्यादा किफायती बनाने के लिए इंटरेस्ट रेट घटाने चाहिए। उन्होंने कहा, भले ही आरबीआई पॉलिसी रेट तय करता है लेकिन बजट से मिनिमम डाउन पेमेंट को घटाने के साथ कुछ नियमों में छूट देकर होमबायर्स को मदद दी जा सकती है।

अफोर्डेबिल हाउसिंग लिमिट में बदलाव

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अफोर्डेबिल हाउसिंग मानने के लिए 45 लाख रुपये का मौजूदा भारत के कई शहरों के लिए सही नहीं है। इसे बढ़ाकर 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा करना चाहिए।

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जीएसटी पर राहत

सस्ते और निर्माणाधीन घरों के लिए मौजूदा जीएसटी स्ट्रक्चर डेवलपर्स पर अतिरिक्त बोझ डालता है, जिससे खरीदारों के लिए यूनिट्स की कीमत बढ़ जाती है। भले ही स्टील और सीमेंट पर जीएसटी 18 फीसदी और 28 फीसदी है, लेकिन डेवलपर्स टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर सकते। एक्सपर्ट्स ने कहा, सरकार को इस बजट में इनपुट टैक्स क्रेडिट बहाल करना चाहिए। इससे डेवलपर्स पर दबाव कम हो सकता है।

रेंटल हाउसिंग

Pharande Spaces और CREDAI Pune-Metro के प्रेसिडेंट अनिल फरांदे के मुताबिक, भारत का रेंटल हाउसिंग सेक्टर खास आकर्षक नहीं है। डेवलपर्स को टैक्स बेनिफिट देकर सरकार इस सेक्टर को बढ़ावा दे सकती है।

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