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Union Budget 2023 : मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती की कीमत ग्लोबल इकोनॉमी को चुकानी पड़ेगी, RBI बुलेटिन का अनुमान

Union Budget 2023: RBI की मंथली बुलेटिन में कहा गया है कि उभरते देशों की हालत ज्यादा नाजुक है। उन्हें विदेशी पूंजी की निकासी, हाई इनफ्लेशन और सुस्त पड़ती इकोनॉमिक ग्रोथ का सामना करना पड़ रहा है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने इनफ्लेशन को कंट्रोल करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाए हैं

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 21, 2022 पर 6:17 PM
Union Budget 2023 : मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती की कीमत ग्लोबल इकोनॉमी को चुकानी पड़ेगी, RBI बुलेटिन का अनुमान
2022-23 में रिटले इनफ्लेशन 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। इस फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.9 फीसदी रहने की उम्मीद है।

Union Budget 2023: इस साल (2022) मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के तहत उठाए गए कदमों की बड़ी कीमत ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) को चुकानी पड़ेगी। RBI की मासिक बुलेटिन में यह अनुमान जताया गया है। यह बुलेटिन 20 दिसंबर को जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि उभरते देश ज्यादा कमजोर स्थिति में दिख रहे हैं। उन्हें सुस्त पड़ती ग्रोथ, हाई इनफ्लेशन के साथ ही करेंसी में कमजोरी और विदेशी मुद्रा बाहर जाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। दुनियाभर में केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं। RBI का बुलेटिन हर महीने आता है। इसमें इंडिया और विदेश की इकोनॉमिक ग्रोथ के बारे में अहम जानकारियां शामिल होती हैं। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर में मजबूती और डिफॉल्ट रेट बढ़ने से कर्ज को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ के इंजन बनेंग एशियाई देश

बुलेटिन में कहा गया है कि अगर कुछ समस्याओं को छोड़ दिया जाए तो 2024 में ज्यादातर देशों में हल्की रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसमें कहा गया है, "एशिया में उभरते देशों के दुनिया का ग्रोथ इंजन बनने की संभावना है। 2023 में ग्लोबल ग्रोथ में इन देशों की 75 फीसदी हिस्सेदारी होगी। यह 2024 में करीब 60 फीसदी रहेगी।" 7 दिसंबर को RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट 35 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ा दिया था। इनफ्लेशन में उम्मीद से ज्यादा कमी आने के बाद रेपो में यह वृद्धि की गई थी।

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