Union Budget 2023: बीते सालों में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के मामले में सरकार के रुख में बड़ा बदलाव आया है। खासकर कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद सरकार ने बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए आवंटन काफी बढ़ाया है। इसकी कुछ खास वजहें रही हैं। लेकिन, एक बात तय है कि इससे इकोनॉमी को बहुत फायदा हुआ है। जब अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप की इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है तब इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया में सबसे ज्यादा है। उम्मीद है कि अगले यूनियन बजट में भी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर सरकार का फोकस बना रहेगा। फाइनेंस मिनिस्चर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।
इस फाइनेंशियल ईयर 7.5 लाख करोड़ है कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट
सरकार ने बजट 2022 में इस फाइनेंशियल ईयर के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। यह एक साल पहले के आवंटन के मुकाबले 24 फीसदी ज्यादा है। यह फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के आवंटन के मुकाबले दोगुना से ज्यादा है।
बीते 9 साल में सिर्फ एक बार घटा है पूंजीगत खर्च के लिए आवंटन
साल दर साल आधार पर पिछले साल पूंजीगत खर्च में 41 फीसदी वृद्धि देखने को मिली। यह 2014-15 के बजट के मुकाबले सबसे बड़ा उछाल था। पिछले 9 साल में सिर्फ फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी देखने को मिली थी। इससे साफ हो जाता है कि सरकार इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
कुल खर्च में बढ़ रही पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी
पिछले बजट में सरकार के कुल खर्च में पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी 19.02 फीसदी थी। यह फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के बजट के 15.99 फीसदी के मुकाबले अच्छी ग्रोथ है। इससे पहले कई सालों तक सरकार के कुल खर्च में पूंजीगत खर्च की ग्रोथ बहुत सुस्त थी। पिछले दो बजटों से सरकार के रुख में बदलाव देखने को मिला है।
इस साल पूरा हो जाएगा पूंजीगत खर्च का टारगेट
बीते कुछ सालों में सरकार के कुल खर्च में भी वृद्धि देखने को मिली है। बजट अनुमान के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर के दौरान सरकार का कुल खर्च 39.44 है। यह एक साल पहले यानी 2021-22 के मुकाबले 4.63 फीसदी ज्यादा है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में पूंजीगत खर्च जीडीपी का 2.91 फीसदी था। यह पिछले 9 साल में सबसे ज्यादा है।
Controller General of Accounts (CAG) के डेटा के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में सरकार के पूंजीगत खर्च के टारगेट को हासिल कर लेने की उम्मीद है। पिछले साल नवंबर तक सरकार ने टारगेट का 59.6 फीसदी हिस्सा खर्च कर लिया था। पिछले कुछ सालों में पूंजीगत खर्च के इस्तेमाल की दर बढ़ी है।