Union Budget 2023 : इन दिनों बजट की तैयारियां जोरों पर है। वित्त मंत्रालय (finance ministry) में संबंधित स्टेकहोल्डर्स की मीटिंग लगातार जारी हैं। उधर, इंडस्ट्रीज और टैक्सपेयर्स बजट से तमाम उम्मीदें लगाए बैठे हैं। सैलरीड कर्मचारी (salaried employees) टैक्स एग्जम्प्शंस (tax exemptions) की उम्मीद कर रहे हैं तो कारोबारियों की नजर जीएसटी (GST exemption) पर बनी हुई है। बहरहाल, Union Budget को तैयार करना एक मुश्किल प्रक्रिया है और इसके लिए फंड के आवंटन को समझना आम आदमी के लिए आसान नहीं है। हम यहां बजट आवंटन के लिए मिलने वाले पैसे और खर्च का लेखाजोखा समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारतीय संविधान (Constitution of India) के अनुच्छेद 112 के मुताबिक, केंद्र सरकार को 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाले प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए अनुमानित रेवेन्यू और खर्च का लेखा-जोखा संसद को प्रदान करना चाहिए। हालांकि, हमारे संविधान में ‘बजट’ (budget) शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसके लिए वार्षिक वित्तीय विवरण (annual financial statement) शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसे ही आम बजट के रूप में जाना जाता है।
कहां से होती है सरकार को इनकम
सरकार के कुल रेवेन्यू को दो सोर्सेज में बांटा जा सकता है- टैक्स रेवेन्यू (tax revenue) और नॉन टैक्स रेवेन्यू। सरकार की प्राप्तियों में उधारी और करों की बड़ी हिस्सेदारी होती है। वहीं टैक्स रेवेन्यू का इसमें 46 फीसदी योगदान होता है, उधारी के रूप में लगभग 35 फीसदी पैसा आता है। कुल टैक्स रेवेन्यू में इनकम टैक्स से 15 फीसदी, जीएसटी से लगभग 16 फीसदी और कॉर्पोरेट टैक्स (corporate tax) से 15 फीसदी हिस्सा आता है। सरकार को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी से 7 फीसदी की प्राप्ति होती है, वहीं कस्टम ड्यूटी (custom duty) और नॉन टैक्स इनकम का योगदान 5-5 फीसदी है। सरकार को नॉन डेट कैपिटल (non debt capital) से लगभग 2 फीसदी मिलते हैं।
अब खर्च की बात करें तो सरकार को कर्ज की ब्याज चुकाने में सबसे ज्यादा खर्च करना पड़ता है। लगभग 20 फीसदी पैसा ब्याज चुकाने, वहीं 17 फीसदी इनकम टैक्स और फीस पर राज्यों का हिस्सा देने में चली जाती है। 15 फीसदी रकम केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित स्कीम्स के लिए आवंटित है, वहीं लगभग 10 फीसदी पैसा सरकारी विभागों और स्वायत्त संस्थानों के वेनत और खर्च में चला जाता है। मिश्रित व्यय लगभग 9 फीसदी है, वहीं 8 फीसदी डिफेंस और 8 फीसदी ही सब्सिडी के मद में चला जाता है। लगभग 4 फीसदी रकम पेंशन के रूप में चली जाती है।