Union Budget 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 साल के कार्यकाल में कितना बदल गया है यूनियन बजट?

Union Budget 2023: साल 2014 से लेकर अब तक यूनियन बजट ने बदलाव का लंबा सफर तय किया है। इसकी तारीख बदलने गई। इसका स्वरूप बदल गया। अब तो यह पूरी तरह पेपरलेस हो गया है। बदलाव की यह परंपरा खत्म नहीं हुई। लोगों की नजरें इस बात पर लगी हैं कि यूनियन बजट 2023 क्या बदलाव लेकर आता है

अपडेटेड Jan 09, 2023 पर 1:11 PM
Budget 2023: CURATED BY: RAKESH RANJAN | अपडेटेड JAN 07, 2023 पर 3:36 PM Union Budget 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 साल के कार्यकाल में कितना बदल गया है यूनियन बजट? नरेंद्र मोदी के 2014 में देश का प्रधानमंत्री बनने से अब तक यूनियन बजट ने कई बदलाव देखे हैं। बदलाव की सिलसिला पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुरू किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस सिलसिले को आगे बढ़ाया। यह सिलसिला अभी थमा नहीं है।

Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Budget 2023) पेश करेंगी। यह केंद्र की नरेंद मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में बनने वाली नई सरकार फाइनेंशियल ईयर 2024-25 का पूर्ण बजट पेश करेगी। नरेंद्र मोदी के 2014 में देश का प्रधानमंत्री बनने से अब तक यूनियन बजट ने कई बदलाव देखे हैं। बदलाव की सिलसिला पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुरू किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उस सिलसिले को आगे बढ़ाया। यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। पिछले 9 सालों में बजट में क्या-क्या बदलाव आया है, रेल बजट कब यूनियन बजट का हिस्सा बन गया, बजट डॉक्युमेंट्स के लिए कब बीफ्रकेस का इस्तेमाल बंद हो गया? आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

1. बजट पेश करने की तारीख बदली

यूनियन बजट को 2016 तक फरवरी की आखिरी तारीख को पेश करने की पंरपरा जारी थी। 2017 में इस परंपरा पर ब्रेक लग गया। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार 2017 में 1 फरवरी को बजट पेश किया। तब से हर साल फरवरी की पहली तारीख को यूनियन बजट पेश किया जाता है। इस साल भी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। दरअसल, इंडिया में फाइनेंशियल ईयर अप्रैल से शुरू होकर मार्च में खत्म होता है। 1 फरवरी को बजट पेश करने से सरकार के पास बजट प्रस्ताव और वित्त विधेयक को पारित कराने के लिए 31 मार्च का समय होता है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों में बजट पर व्यापक चर्चा के बाद इसे पारित किया जाता है। इससे यह 1 अप्रैल से लागू हो जाता है।


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2. रेल बजट यूनियन बजट का हिस्सा बना

2016 से पहले हर साल यूनियन बजट से पहले रेल बजट पेश किया जाता था। आम तौर पर इसे यूनियन बजट से दो दिन पहले प्रजेंट किया जाता था। रेल मंत्री इसे पेश करता था। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही थी। लेकिन, केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से इस परंपरा को बंद कर दिया गया। साल 2016 में अरुण जेटली ने जो यूनियन बजट पेश किया था, उसमें रेल बजट शामिल था। उसके बाद से हर साल यूनियन बजट में ही रेलवे के खर्च और आमदनी का ब्योरा शामिल होता है। रेलवे के लिए आवंटन का प्रस्ताव भी यूनियन बजट में शामिल होता है।

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3. आर्थिक सर्वेक्षण की तारीख में भी बदलाव

हर साल यूनियन बजट से पहले आर्थिक सर्वे पेश किया जाता है। इसलिए बजट पेश करने की तारीख बदलने के साथ ही इसकी तारीख भी बदल गई। अब इसे बजट से ठीक एक दिन पहले पेश किया जाता है। इस बार भी इसे 31 जनवरी को पेश किया जाएगा। 31 जनवरी को बजट सत्र शुरू होगा। उसी दिन Economic Survey संसद में पेश किया जाएगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करता है। इसे वित्त मंत्री संसद में पेश करती हैं। इसमें करेंट फाइनेंशियल ईयर में सरकार की उपलब्धियों के बारे में जानकारी होती है।

4. बजट डॉक्युमेंट्स के लिए ब्रीफकेस का इस्तेमाल बंद

फाइनेंस मिनिस्टर यूनियन बजट पेश करने के लिए बजट डॉक्युमेंट्स को ब्रीफकेस में लेकर संसद पहुंचते थे। इसमें से बजट डॉक्युमेंट्स निकालते थे। फिर उनका बजट भाषण शुरू होता था। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 2019 में ब्रीफकेस का इस्तेमाल बंद कर दिया। वह बजट डॉक्युमेंट्स को लाल कपड़े में लेकर संसद पहुंचीं। दरअसल, इंडिया में व्यापारी समुदाय आज भी बहीखाते को रखने के लिए लाल कपड़े का इस्तेमाल करता है। लेकिन, 2021 में वित्तमंत्री ने बजट डॉक्युमेंट्स के लिए टैबलेट का इस्तेमाल किया। तब से बजट डॉक्युमेंट्स के लिए टैबलेट का इस्तेमाल हो रहा है।

5. हलवा सेरेमनी की परंपरा भी खत्म

साल 2020 में हलवा सेरेमनी की परंपरा पर भी ब्रेक लग गया। इसकी बड़ी वजह कोरोना की महामारी को माना जा रहा है। इससे पहले नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय) में हलवा सेरेमनी का आयोजन होता था। वित्तमंत्री खुद समारोह में मौजूद रहती थीं। हलवा बनने के बाद वहां मौजूद सभी लोगों को उसे बांटा जाता था। उसके बाद बजट दस्तावेज की छपाई का काम शुरू होता था। हलवा सेरेमनी को बजट की पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता था।

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