Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) पेश होने में कुछ दिन का समय रह गया है। बजट को ठीक तरह से समझने के लिए ऐसे शब्दों (Terms) का मतलब जान लेना जरूरी है, जिनका फाइनेंस मिनिस्टर के बजट भाषण में बार-बार इस्तेमाल होता है। बजट डॉक्युमेंट्स में भी आपको यह शब्द बार-बार नजर आएंगे। खासकर हर स्टूडेंट्स को इन शब्दों का मतलब समझना चाहिए। अगर आप इन शब्दों का मतलब ठीक से नहीं जानते हैं तो आपको यूनियन बजट समझने में दिक्कत आ सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।
एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट (Annual Financial Statement)
यूनियन बजट को एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी कहा जाता है। एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट में सरकार के हर मंत्रालय के लिए आवंटित अमाउंट का उल्लेख होता है। यह समझ लेना जरूरी है कि यूनियन फाइनेंशियल स्टेटमेंट में अगले वित्त वर्ष के खर्च के लिए आवंटन होता है।
डिमांड फॉर ग्रांट (Demand for Grant)
डिमांड फॉर ग्रांट में सरकार के अनुमानित खर्च का उल्लेख होता है। इसमें रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, कैपिटल एक्सपेंडिचर और सरकार के अनुदान शामिल होते हैं। ये सभी अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए होते हैं।
फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit)
इस टर्म का इस्तेमाल बजट डॉक्युमेंट्स में सबसे ज्यादा होता है। सरकार के कुल खर्च और कुल रेवेन्यू के बीच के अंतर को फिस्कल डेफिसिट कहा जाता है। सरकार उधार के जरिए जो पैसे जुटाती है वह फिस्कल डेफिसिट में शामिल नहीं होता है। फिस्कल डेफिसिट की स्थिति तब पैदा होती है, जब सरकार का कुल खर्च उसके कुल रेवेन्यू से ज्यादा होता है। इस फाइनेंशियल ईयर मे सरकार का फिस्कल डेफिसिट 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
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रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit)
सरकार के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर और रेवेन्यू रिसीट्स के बीच के अंतर को रेवेन्यू डेफिसिट कहा जाता है। इससे पता चलता है कि फाइनेंशियल ईयर में सरकार को रेवेन्यू के रूप में मिलने वाला फंड उसके एक्सपेंडिचर के मुकाबले कम है।
गवर्नमेंट बॉरोइंग (Government borrowing)
सरकार को हर साल बाजार से काफी पैसा उधार लेना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि सरकार की इनकम उसके खर्च के मुकाबले कम रहती है। दोनों के बीच को अंतर का पूरा करने के लिए सरकार मार्केट से उधार लेती है। इसे गवर्नमेंट बॉरोइंग कहा जाता है। सरकार बजट में यह बता देती है कि वह अगले फाइनेंशियल ईयर में उधार से कितने पैसे जुटाएगी।