Union Budget 2023: आजादी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में रह चुके हैं ये बजट, इन्हें खास नाम भी मिला है

Union Budget 2023: अब तक जिन बजटों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, उनमें ड्रीम बजट, रोलबैक बजट और ब्लैक बजट शामिल हैं। इन बजटों को अलग-अलग वजहों से ये नाम दिए गए हैं। आइए जानते हैं इन्हें खास नाम देने की क्या वजह रही और इन्हें क्यों खास बजट माना जाता है

अपडेटेड Jan 10, 2023 पर 1:24 PM
आजाद भारत का पहला बजट जॉन मथाई ने पेश किया था। वह कांग्रेस सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर थे। इस बजट में प्लानिंग कमीशन की स्थापना का प्रस्ताव शामिल था।

Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अपना पांचवां बजट 1 फरवरी को पेश करेंगी। सीतारमण के नाम सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड है। 1 फरवरी, 2020 को उन्होंने जो बजट भाषण दिया था, वह 2 घंटा 42 मिनट का था। सबसे छोटा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड एचएम पटेल के नाम है। उन्होंने 1977 में यह बजट भाषण दिया था। आजादी के बाद पेश किए गए बजटों में कई ऐसे यूनियन बजट हैं, जो बहुत ज्यादा चर्चा में रहे हैं। चर्चा में रहने की अलग-अलग वजहें रहीं। हम आपको ऐसे कुछ बजटों के बारे में बता रहे हैं, जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। इस वजह से उन्हें अलग नाम भी दिया गया।

आजाद का भारत का पहला बजट

आजाद भारत का पहला बजट जॉन मथाई ने पेश किया था। वह कांग्रेस सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर थे। इस बजट में प्लानिंग कमीशन की स्थापना का प्रस्ताव शामिल था। प्लानिंग कमीशन का काम देश के सभी संसाधनों का आकलन करना था। फिर, उसके समुचित इस्तेमाल के लिए योजना तैयार करना था। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू प्लानिंग कमीशन के पहले चेयरमैन थे।

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रोलबैक बजट (Rollback Budget)

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की एनडीए सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने फाइनेंशियल ईयर 2002-2003 का यूनियन बजट पेश किया था। इस बजट को रोलबैक बजट के नाम से जाना जाता है। इसकी वजह यह है कि इस बजट के कई प्रस्तावों को सरकार ने वापस ले लिया था।

मिलेनियम बजट (Millennium Budget)

एनडीए सरकार के वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने 2000 में मिलेनियम बजट पेश किया था। इसमें आईटी इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए व्यापक रोडमैप पेश किया गया था। इस बजट में सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स को दिया जाने वाला इनसेंटिव वापस ले लिया गया था। इसमें कंप्यूटर और कंप्यूटर एक्सेसरी पर कस्टम ड्यूटी भी घटा दी गई थी।

ड्रीम बजट (Dream Budget)

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने टैक्स कलेक्शंस बढ़ाने के लिए टैक्स रेट में कमी करने के Laffer Curve के सिद्धांत का इस्तेमाल किया था। फाइनेंशियल ईयर 1997-98 के इस बजट को ड्रीम बजट कहा जाता है। इसमें कॉर्पोरेट टैक्स में कमी किया गया था। पर्सनल इनकम टैक्स के रेट को भी 40 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी किया गया था। इस बजट में FDI बढ़ाने वाले उपायों का भी ऐलान किया गया था।

एपकल बजट (Epochal Budget)

पूर्व वित्तमंत्री मनमोहन सिंह के 1991 के बजट ने लाइसेंस राज खत्म करने की शुरुआत की थी। इस बजट में उदारीकरण की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। सिंह ने यह बजट तब पेश किया था, जब इंडिया की इकोनॉमी मुश्किल में थी। जरूरी चीजों के आयात के लिए काफी कम विदेशी मुद्रा बची थी। तब बजट में एक्सपोर्ट बढ़ाने के उपायों का ऐलान किया गया था। कस्टम ड्यूटी को भी 220 फीसदी से घटाकर 150 फीसदी कर दिया गया था।

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कैरट एंड स्टिक बजट (Carrot and Stick Budget)

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की सरकार ने 1991 में लाइसेंस राज खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन, इसकी असल शुरुआत तब हुई थी, जब 1986 में वीपी सिंह ने बजट पेश किया था। 28 फरवरी 1986 को पेश इस बजट को कैरट एंड स्टिक बजट के नाम से जाना जाता है। इस बजट में MODVAT का ऐलान किया गया था। इस बजट में स्मगलर्स, कालाबजारी करने वालों और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया था।

ब्लैक बजट (Black Budget)

पूर्व प्रधानमंत्री की सरकार में वित्त मंत्री वाईबी चव्हाण ने 1973-74 का जो बजट पेश किया था, उसे ब्लैक बजट के नाम से जाना जाता है। इसकी वजह यह है कि तब सरकार का फिस्कल डेफिसिट 550 करोड़ रुपये था। तब देश बड़े वित्तीय संकट का सामना कर रहा था।

प्रणब मुखर्जी का 2012 का बजट

फाइनेंशियल ईयर 2012-13 के बजट में General Anti Avoidance Rules या GAAR पेश किया गया था। तब प्रणव मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में GAAR का ऐलान किया था। सरकार का मकसद कुछ खास मामलों में इसका इस्तेमाल करना था। इस रूल्स की बाद में काफी आलोचना हुई थी। कुछ मामलों में बड़ी कंपनियों के खिलाफ टैक्स के मामलें अदालत पहुंच गए थे। इनमें फैसला सरकार के खिलाफ आया था।

अरुण जेटल का 2017 का बजट

अरुण जेटल के 2017 के बजट में जनरल बजट में रेल बजट को शामिल कर दिया गया था। इससे रेल बजट पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई थी। इस बजट में जीएसटी का भी ऐलान किया था। इस बजट में फॉर्म सेक्टर, हेल्थकेयर और फिस्कल मैनेजमेंट पर फोकस किया गया था। इस बजट में 2.5 लाख से 5 लाख रुपये इनकम वाले लोगों के लिए टैक्स का रेट 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया था।

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