Budget 2023: सरकार को इस वक्त फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर बहुत ज्यादा फोकस नहीं करना चाहिए। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की सदस्य अशिमा गोयल (Ashima Goyal) ने यह कहा है। वह MPC के तीन बाहरी सदस्यों में से एक हैं। उनका मानना है कि अभी ग्लोबल इकोनॉमी पर स्लोडाउन का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए यह सही वक्त नहीं है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब अमेरिका, यूरोप और इंग्लैंड जैसी बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडिया में इकोनॉमी की स्थिति अपेक्षाकृत अच्छी है। गोयल ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने पर फोकस बनाए रखना सबसे बेहतर होगा।
