Union Budget 2023: होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन लिमिट बढ़ाने से घर खरीदारों को मिलेगी बड़ी राहत, घरों की बिक्री भी बढ़ेगी

Union Budget 2023: CREDAI ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कहा है कि पिछले 7-8 महीनों में होम लोन का इंटरेस्ट रेट कई बार बढ़ा है। इससे होम लोन लेकर घर खरीदने वाले लोगों की EMI काफी ज्यादा बढ़ गई है। अगर होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ा दी जाती है तो उन्हें बहुत राहत मिलेगी

अपडेटेड Dec 29, 2022 पर 7:14 PM
सरकार को घर मालिकों के लिए भी राहत का ऐलान करना चाहिए। सालाना 20 लाख रुपये तक की रेंटल इनकम पर 100 फीसदी डिडक्शन की इजाजत होनी चाहिए।

Union Budget 2023: घर खरीदने का प्लान बना रहे लोगों को निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के अगले बजट (Budget 2023) से बहुत उम्मीदें हैं। रियल एस्टेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं ने भी फाइनेंस मिनिस्ट्री निर्मला सीतारमण को अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। CREDAI ने सरकार से होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की मांग की है। अभी होम लोन के इंटरेस्ट पर एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम 2 लाख रुपये के डिडक्शन की इजाजत है। क्रेडाई का कहना है कि निर्मला सीतारमण को 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट (Union Budget 2023-24) में इस लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देनी चाहिए। इस साल अप्रैल से रेपो रेट लगातार बढ़ा है। इससे होम लोन का इंटरेस्ट रेट भी काफी ज्यादा बढ़ गया है।

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7-8 महीने में 2 फीसदी बढ़ चुका है होम लोन का इंटरेस्ट


पिछले 7-8 महीनों में होम लोन का इंटरेस्ट रेट करीब 2 फीसदी बढ़कर 8.5 फीसदी हो गया है। इस वजह से घर खरीदने वाले लोगों की EMI भी बढ़ गई है। क्रेडाई ने कहा है कि इस वजह होम लोन इंटरेस्ट पर मिलने वाले डिडक्शन को बढाने की जरूरत है। उसने कहा है कि इससे न सिर्फ लोगों लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे बल्कि घर खरीदने में लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ेगी।

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रियल एस्टेट सेक्टर नौकरियों के बड़े मौके पैदा कर सकता है

CREDAI के प्रेसिडेंट हर्षवर्द्धन पटोडिया ने कहा, "हमने वित्त मंत्री की जो सिफारिशें भेजी हैं, उनमें रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ बनाए रखने, घरों की मांग बढ़ाने और घर खरीदारों के लिए टैक्स बेनेफिट बढ़ाने पर फोकस है। रियल एस्टेट सेक्टर में बहुत कम समय में करोड़ों नौकरियों के मौके पैदा करने की क्षमता है। GDP में भी इसका काफी योगदान है।" उन्होंने कहा कि होम लोन का इंटरेस्ट रेट लगातार बढ़ने से छोटी अवधि में घरों की मांग पर असर पड़ सकता है।

अफोरेडेबल होम के लिए प्राइस लिमिट बढ़ाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में रियल एस्टेट मार्केट में धीरे-धीरे रिकवरी आ रही थी। खासकर घरों की मांग बढ़ने से कंपनियां खुश थीं। लेकिन, इंटरेस्ट रेट बार-बार बढ़ने से घर खरीदने वालों के सेंटिमेंट पर असर पड़ने की आशंका है। क्रेडाई का कहना है कि अभी एफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 45 लाख रुपये की सीमा है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है, क्योंकि पिछले महीनों में घर में इस्तेमाल होने वाले चीजों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। लेबर कॉस्ट भी बढ़ा है।

रेंटल इनकम को बढ़ावा देने के उपाय होने चाहिए

क्रेडाई ने कहा है कि सरकार को घर मालिकों के लिए भी राहत का ऐलान करना चाहिए। सालाना 20 लाख रुपये तक की रेंटल इनकम पर 100 फीसदी डिडक्शन की इजाजत होनी चाहिए। इससे उन लोगों की दिलचस्पी किराए से कमाई करने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करने में दिलचस्पी बढ़ेगी, जिनके पास खर्च करने के लिए फंड है। CREDAI में 21 राज्यों के 221 शहरों के 13,000 रियल एस्टेट कंपनियां और डेवलपर्स शामिल हैं।

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