Union Budget 2023: इकोनॉमिस्ट्स, एक्सपर्ट्स के साथ 13 जनवरी को बजट पर चर्चा करेंगे पीएम नरेंद्र मोदी

Union Budget 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इकोनॉमिस्ट्स और अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट्स के साथ इकोनॉमी की स्थिति पर चर्चा करेंगे। बैठक में इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के उपायों के बारे में भी चर्चा होगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी

अपडेटेड Jan 10, 2023 पर 9:27 AM
एक सीनियर गवर्नमेंट ऑफिसर के मुताबिक, 13 जनवरी को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल होंगे।

Union Budget 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 13 जनवरी को इकोनॉमिस्ट्स और एक्सपर्ट्स के साथ यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) के बारे में चर्चा करेंगे। यह बैठक नीति आयोग (Niti Aayog) में होगी। इसमें अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट्स शामिल होंगे। बैठक में इकोनॉमी की स्थिति और ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होगी। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 का यूनियन बजट 1 फरवरी को पेश होगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इसे पेश करेंगी। अगले साल लोकसभा के चुनावों से पहले यह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। चुनावों के नतीजों के बाद केंद्र की नई सरकार फाइनेंशियल ईयर 2024-25 का पूर्ण बजट पेश करेगी। इसलिए 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट को बहुत अहम माना जा रहा है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री भी शामिल होंगे

एक सीनियर गवर्नमेंट ऑफिसर के मुताबिक, 13 जनवरी को होने वाली बैठक में कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल होंगे। डिमांड में आई कमी की वजह से इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में इकोनॉमिक ग्रोथ 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। ऐसा होने पर इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा इकोनॉमिक ग्रोथ वाली इकोनॉमी का ताज गंवा सकता है। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री ने पहले आधिकारिक अनुमान में इस फाइनेंशियल ईयर में इकोनॉमिक ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (2021-22) में इकोनॉमिक ग्रोथ 8.7 फीसदी थी।


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सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी का ताज गंवा सकता है भारत

इस फाइनेंशियल ईयर में इकोनॉमिक ग्रोथ का स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री का अनुमान सरकार के 8-8.5 फीसदी के पहले के अनुमान से काफी कम है। हालांकि, यह RBI के 6.8 फीसदी अनुमान से ज्यादा है। अगर स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री या सरकार का अनुमान सही रहता है तो इंडिया से ज्यादा इकोनॉमिक ग्रोथ सऊदी अरब की होगी। सऊदी अरब की इकोनॉमिक ग्रोथ इस फाइनेंशियल ईयर में 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इस फाइनेंशियल ईयर की जुलाई-सितंबर में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी थी। यह इस दौरान सऊदी अरब की 8.7 फीसदी ग्रोथ के मुकाबले कम है।

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सऊदी अरब की इकोनॉमी से बहुत बड़ी है इंडिया की इकोनॉमी

हालांकि, यह ध्यान में रखना है कि इंडियन इकोनॉमी सऊदी अरब की इकोनॉमी के मुकाबले काफी बड़ी है। इंडिया दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है। सऊदी अरब इस लिस्ट में 19वें पायदान पर है। इंडिया आबादी के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। बहुत जल्द इसके दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाने का अनुमान है। इंडिया की इकोनॉमी का स्वरूप काफी डायवर्सिफायड है, जबकि सऊदी अरब की इकोनॉमी में ऑयल से होने वाली इनकम का बड़ा हाथ है।

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