Union Budget 2023 : मिडिल क्लास पर अब तक नहीं लगाया टैक्स, यह बोलकर क्या संकेत दे गईं Nirmala Sitharaman?
Union Budget 2023 : निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों के मामलों इस सरकार का रुख पिछली सरकारों से बिल्कुल अलग है। बैंकों के कामकाज का तरीका खासा बदला है। बैंक पेशेवर हुए हैं और उन्हें स्वतंत्रता दी गई है। अब बैंकों के पास लोन की सिफारिश करने वाले फोन नहीं आते हैं
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सोशल वेलफेयर और चैरिटी पर खर्च में कोई कमी नहीं की गई है
Union Budget 2023 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman ) ने कहा है कि उनकी सरकार ने अभी तक मिडिल क्लास पर कोई टैक्स नहीं लगाया है। 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री कर दी गई है। हालांकि, उन्होंने माना कि अभी भी इस क्लास के लिए काफी कुछ किया जा सकता है। सीतारमण ने आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य (पत्रिका) को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बजट में सरकार का जोर सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि बैंक अब पेशेवर हो गए हैं। सरकार के पास खर्च के लिए फंडिंग के कई ऑप्शन हैं।
बैंकों में किए 4 रिफॉर्म
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों के मामलों में पिछली और मौजूदा सरकारों के कामकाज के तरीके में बदलाव आया है। भाई-भतीजावाद बिल्कुल खत्म हो चुक है। एसेट क्वालिटी रिव्यू के मामले में चार कदम उठाए गए। पहले बैंकों की समस्याओं की पहचान की गई। एनपीए है या नहीं, कस्टमर पैसा वापस करने की स्थिति में है या नहीं, यह देखा गया। दूसरा, समाधान पर ध्यान दिया गया। तीसरा, रिकैपटिलाइज किया गया, यानी बैकों को पैसा दिया गया। चौथा, रिफॉर्म पर जोर दिया गया। इन्हें 4 आर का नाम दिया गया।
अब मोदी सरकार में बैंकों के मनमानी कर्ज देने के चलन पर रोक लगी है। अब कोई बैंक को लोन देने के लिए फोन नहीं करता। मोदी सरकार में बैंक का पैसा तो लौटाना पड़ेगा। अब बैंकों की वित्तीय सेहत इतनी बेहतर है कि वे जब चाहें पैसा जुटा सकते हैं। इसलिए, उन्हें सही रेट पर पैसा देने में दिक्कत नहीं आ रही है।
फ्रीबीज का बोझ मोदी सरकार पर डाल रहे राज्य
चुनाव जीतने के लिए वादे तो कर दिए जाते हैं। लेकिन सरकार में आने के बाद ही वित्तीय स्थिति की असली तस्वीर सामने आती है। फ्रीबीज के लिए बजट में व्यवस्था करनी होती है। अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो यह फ्रीबीज नहीं है। हालांकि, ऐसा एक हद तक ही किया जा सकता है। लेकिन ऐसा ज्यादातर राज्यों में नहीं हो रहा है। राज्य रेवड़ी दे देते हैं और बोझ केंद्र सरकार के ऊपर डालते हैं। ऐसा कई राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के मामले में हो रहा है। मुफ्त में बिजली देने के कारण डिस्कॉम्स का बकाया बढ़ता जा रहा है। ऐसे ही मामले सिरदर्द बढ़ा रहे हैं।
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कैपिटल एक्सपेंडिचर पर है सरकार का जोर
इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से जुड़े सवाल पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि सोशल वेलफेयर पर खर्च में कोई कमी नहीं की गई है। गरीब के लिए लगातार काम कर रहे हैं। सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च बढ़ाया जा रहा है। कैपिटल एक्सपेंडिचर की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि 1 रुपये रेवेन्यू एक्सपेंडिचर पर खर्च करने से 45 पैसे से ज्यादा बेनिफिट नहीं मिलेगा। वहीं कैपिटल एक्सपेंडिचर पर लॉन्ग टर्म में लगभग 3.50 रुपये का फायदा मिलेगा।
कैसे शाइनिंग स्टार बना भारत?
पूर्व में टॉप 5 बीमारू देशों में गिनती से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि 2013 तक ऐसी ही स्थिति थी। 2008 के आर्थिक संकट के बाद हालात बिगड़ गए थे। महंगाई दहाई अंक में थी, ग्रोथ रेट कमजोर पड़ रही थी। करप्शन बढ़ता जा रहा था, इसलिए विदेशी निवेशक पूंजी निकाल रहे थे। हमारे इंडस्ट्रियलिस्ट दूसरे देशों में पलायन कर रहे थे। फॉरेन रिजर्व खासा घट गया था। हालांकि 2014 में मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार ने शुरुआती दो साल में खासी कोशिशें कीं। एफडीआई नीतियों में बदलाव किया। इनवेस्टर्स वापस आने लगे। जीएसटी और आईबीसी को लागू किया। इसके बाद हम बीमारू देशों की सूची से निकलकर दुनिया के लिए शाइनिंग स्टार बने।
बेरोजगारी और किसान
बेरोजगारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि नए आइडियाज को सरकार फंडिंग के जरिये पूरी मदद दे रही है। स्टार्टअप के सपोर्ट की पूरी व्यवस्था की गई है। टैक्स बेनिफिट दे रहे हैं। फंडिंग के लिए इनवेस्टर्स को प्रोत्साहन दे रहे हैं। कोविड के दौर में इमरजेंसी क्रेडिट की व्यवस्था की गई है। इससे एमएसएमई को राहत मिली। इम्प्लॉयमेंट देने वालों को खासा प्रोत्साहन दिया गया।
किसान बिल से पीछे हटने के सवाल पर सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों के हित में काम करती रहेगी। उनकी आय बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे। हालांकि, उन्होंने कानूनों में कमी की बात को खारिज कर दिया।
सरकारी खर्च में बढ़ोतरी पर निर्मला सीतारमण ने कहा, इन दिनों कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए फंडिंग के बहुत ऑप्शन है। हम एसेट मोनेटाइजेशन को लेकर आए हैं। एसेट को लीज पर देकर फंडिंग जुटाई गई है। टोल का एक ऑप्शन है। हमने फंडिंग के कई रास्ते निकाले हैं, जिसके खर्च बढ़ाना संभव हुआ है।
मिडिल क्लास के लिए क्या होगा
मिडिल क्लास को क्या मिलेगा? इस पर वित्तमंत्री ने कहा, मैं भी मिडिल क्लास से हूं। उनका प्रेशर मैं समझती हूं। इस सरकार ने मिडिल क्लास पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया है। हमने 5 लाख तक की इनकम पर टैक्स खत्म कर दिया। हम 27 शहरों में मेट्रो लाए हैं। मिडिल क्लास शहर की ओर रुख कर रहे हैं। 100 स्मार्ट सिटी के लिए पैसा दिया गया है। यह मिडिल क्लास के लिए है। ड्रिंकिंग वाटर हर घर तक पहुंचा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा, मिडिल क्लास के लिए कुछ किया जा सकता है। हम उनके लिए आगे भी करते रहेंगे।