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Budget@10: IBC ने बैंकिंग इंडस्ट्री में लाया बड़ा सुधार, लेकिन निजीकरण का काम अभी भी प्रगति पर

Union Budget 2024: पिछले 10 सालों के दौरान बैकिंग इंडस्ट्री में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इनमें सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का मेगा मर्जर, जनधन योजना के तहत एक बड़ी आबादी का बैंक खाता खुलवाना और सबसे अहम इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को लागू करना शामिल हैं। हालांकि, सरकारी बैंकों का निजीकरण का कार्य प्रगति पर है और यह अभी भी एक अधूरा वादा बना हुआ है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 13, 2023 पर 1:56 PM
Budget@10: IBC ने बैंकिंग इंडस्ट्री में लाया बड़ा सुधार, लेकिन निजीकरण का काम अभी भी प्रगति पर
पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) में पिछले 10 केंद्रीय बजट में तीन बार पूंजी निवेश देखा गया है

Union Budget 2024: पिछले 10 सालों के दौरान बैकिंग इंडस्ट्री में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इनमें सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों का मेगा मर्जर, जनधन योजना के तहत एक बड़ी आबादी का बैंक खाता खुलवाना और सबसे अहम इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को लागू करना शामिल हैं। हालांकि, सरकारी बैंकों का निजीकरण का कार्य प्रगति पर है और यह अभी भी एक अधूरा वादा बना हुआ है। निजीकरण एक प्रमुख बैंकिंग रिफॉर्म है, जिसका वादा विभिन्न सरकारों ने किया था।पिछले 10 सालों के दौरान बैंकिंग सेक्टर में किए सभी सुधारों पर आइए एक नजर डालते हैं-

IBC का गठन

तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 25 फरवरी 2015 को केंद्रीय बजट पेश करते हुए ग्लोबल मानकों वाले एक व्यापक बैंकरप्सी कोड के गठन का ऐलान किया था। इसके अलावा जेटली ने लोकसभा में "इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2015" को भी पेश किया। इस कोड को विस्तृत समीक्षा के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया, जिसने 28 अप्रैल, 2016 को विधेयक का एक नया ड्राफ्ट पेश किया। बाद में 2016 में संसद ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को पारित किया। देश में दिवालिया प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए इस सुधार का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था।

IBC का उद्देश्य लेंडर्स और बॉरोअर्स के बीच निष्पक्ष बातचीत की सुविधा के साथ-साथ दिवालियापन की कार्यवाही की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना है। कर्ज में फंसी संपत्तियों का समय पर समाधान और इन संपत्तियों से अधिकतम वसूली सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।

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