Union Budget 2024 : वित्तमंत्री से रोजगार के मौके और महंगाई से राहत के उपाय चाहता है आम आदमी

Budget 2024 : पिछले कुछ सालों में रोजमर्रा की चीजों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इससे आम लोगों खासकर कम आय वर्ग के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में रोजाना इस्तेमाल होने वाली खासकर रोजमर्रा की की चीजों की कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए उपाय करेंगी

अपडेटेड Jan 29, 2024 पर 10:31 AM
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Union Budget 2024 : सरकार को रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे। यूनियन बजट इसके लिए बड़ा मौका हो सकता है। हर साल लाखों युवा वर्कफोर्स का हिस्सा बन रहे हैं। इनके लिए रोजगार के मौके पैदा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

Interim Budget 2024 : केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश होने में कुछ दिन बचे हैं। निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के यूनियन बजट से आम आदमी  को बहुत उम्मीदें हैं। हालांकि, यह अंतरिम बजट होगा। इसमें बड़े बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण खुद इस बारे में संकेत दे चुकी है। फिर भी, आम आदमी को उम्मीद है कि लोकसभा चुनावों से पहले आने वाले इस बजट में वित्तमंत्री आम आदमी को राहत देने के ऐलान कर सकती हैं। उन्हें उम्मीद है कि अंतरिम बजट में रोजगार के मौके बढ़ाने और महंगाई को बढ़ने से रोकने के उपाय हो सकते हैं।

बजट 2024 में महंगाई बढ़ने से रोकने के उपाय शामिल हो सकते हैं

कोरोना की महामारी के बाद से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। खासकर दालों और कुछ खाद्य तेल की कीमतें बढ़ी हैं। रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत भी 1000 रुपये के करीब पहुंच गई है। हालांकि, सरकार ने दो-ढाई महीने पहले इसमें कमी की थी। लेकिन, यह कमी पर्याप्त नहीं है। इसमें और कमी लाने की जरूरत है। सरकार को रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आम आदमी खासकर कम आय वर्ग के लोगों को बहुत राहत मिलेगी। आम आदमी की इनकम का ज्यादा हिस्सा खाने-पीने की चीजों पर खर्च हो जाता है। इसलिए इन चीजों की कीमतें बढ़ने से रोकने के ठोस उपाय होने चाहिए। उम्मीद है कि वित्तमंत्री इस बारे में बजट में कदम उठा सकती हैं।


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पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की जरूरत

लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग हो रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है। इससे आम आदमी को काफी राहत मिलेगी। लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के करीब बनी हुई हैं। कुछ राज्यों में तो पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हैं। इससे कम आय वर्ग के लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वित्तमंत्री बजट में फ्यूल को जीएसटी के तहत लाने का रोडमैप पेश कर सकती हैं। हालांकि, इस बारे में अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल में होगा।

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रोजगार के मौके बढ़ाने पर फोकस जरूरी

सरकार को रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे। यूनियन बजट इसके लिए बड़ा मौका हो सकता है। हर साल लाखों युवा वर्कफोर्स का हिस्सा बन रहे हैं। इनके लिए रोजगार के मौके पैदा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ाया है। इससे रोजगार के मौके बढ़ाने में मदद मिली है। रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) स्कीम का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। इस स्कीम के तहत इकोनॉमी के उन सेक्टर को लाने की जरूरत है, जिनमें लेबर का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

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