Budget 2024 : इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले कुछ सालों में कई बड़े कदम उठाए हैं। नई टैक्स रीजीम की शुरुआत की है। टैक्स-फाइलिंग की प्रकिया को आसान बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। इसके फायदे भी दिखे हैं। आम तौर पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनका ऐलान यूनियन बजट में करती रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वित्तमंत्री 1 फरवरी, 2024 को केंद्रीय बजट में इनकम टैक्स से जुड़े बड़े ऐलान कर सकती हैं। हालांकि, यह बजट अंतरिम बजट होगा। लेकिन, 2019 (अंतरिम बजट) में सरकार ने अंतरिम बजट में कई बड़े ऐलान किए थे। इनकम टैक्स के मोर्चे पर छोटे-छोटे बदलाव करने से टैक्स कंप्लायंस तेजी से बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि पिछले कुछ सालों में रिफॉर्म्स के बाद भी कुछ ऐसी कमियां रह गई हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं क्या हैं ये कमियां जिन्हें दूर करने के फायदे हो सकते हैं।
फेसलेस एसेसमेंट की वजह से टैक्स से जुडे मामलों के निपटारे में देर हो रही है। मामलों के निपटारे में देर होने से इनकम टैक्स अपेलेट ट्राइब्यूनल में अपील की संख्या बढ़ी है। वित्त मंत्री इस मसले के समाधान के लिए कदम उठा सकती हैं। फेसलेस एसेसमेंट की वजह से एसेसिंग अफसर्स के साथ कम्युनिकेशन घटा है। पहले कोई टैक्सपेयर ज्वाइंट अफसर के पास जा सकता था। अफसर उसकी फाइल फिजिकली देख सकता था। वह मसले के समाधान का तरीका बता सकता था। अब इसकी गुंजाइश नहीं रह गई है।
KPB and Associates के पार्टनर पारस सावला ने कहा, "इनकम टैक्स पोर्टल, रेगुलेटरी वेबसाइट और टैक्स पेमेंट वाली वेबसाइट में बड़े बदलाव किए गए हैं। पुरानी वेबसाइट में फाइल रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट की सुविधा थी। नई वेबसाइट में इसे हटा लिया गया है। अगर किसी टैक्सपेयर को टीडीएस क्रेडिट नहीं मिला है तो फिर इस बारे में कम्युनिकेट करने का कोई रास्ता नहीं है।"
कैप्चर किए गए डेटा में मिसमैच और PAN के गलत नंबर की वजह से गलत नोटिस जारी हो रहे हैं जो कई साल बाद टैक्सपेयर्स को मिल रहे हैं। सावला ने कहा कि 10-15 साल बाद डिमांड नोटिस भेजे जा रहे हैं। टैक्स डिमांड के पेमेंट के बाद भी इंडिविजुअल के फ्यूचर रिफंड्स का एडजस्टमेंट टैक्स के साथ किया जा रहा है। चार्टर्डक्लब डॉट कॉम के करण बत्रा ने कहा कि हाल में उन्हें 2017 के मामले का नोटिस मिला है। इस मामले में टैक्सपेयर की मौत हो चुकी है और उसका बेटा विदेश चला गया है। ऐसे मामलों में पेपर्स उपलब्ध नहीं है और पेबर्स हासिल करने के लिए जो वक्त दिया जाता है तो वह मामले के निपटारे के लिहाज से कम है।
जीडीपी और टैक्स का कम रेशियो
टैक्स कंप्लायंस बढ़ाने के लिए सरकार को जल्द कदम उठाने की जरूरत है। टैक्सस्पैनर डॉटकॉम के को-फाउंडर सुधीर कौशिक ने कहा कि अब करीब 7-8 करोड़ रिटर्न फाइल होने लगे हैं जो 2013 में 3.36 करोड़ रिटर्न के मुकाबले काफी ज्यादा है। लेकिन, अब भी इंडिया में टैक्स और जीडीपी का रेशियो सिर्फ 5-6 फीसदी है। विकसित देशों में यह 25-30 फीसदी है। जब तक एग्रीकल्चर इनकम को टैक्स के दायरे में नहीं लाया जाता है टैक्स और जीडीपी रेशियो कम बना रहेगा।