Union Budget 2024: बजट 2023 में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों को लगा था झटका

31 मार्च, 2023 तक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता था। बजट 2023 में वित्तमंत्री ने कहा था कि सालाना 5 लाख रुपये से ज्यादा प्रीमियम वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का मैच्योरिटी अमाउंट टैक्सेबल होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के इस ऐलान से इंश्योरेंस कंपनियों को भी बड़ा झटका लगा था। इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी

अपडेटेड Dec 13, 2023 पर 1:59 PM
1 अप्रैल, 2023 से पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP छोड़कर) की मैच्योरिटी पर बोनस सहित मिलने वाली पूरी रकम इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री होती थी।

Budget 2024: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में टैक्स-सेविंग के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों को झटका दिया था। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता था। बजट 2023 में वित्तमंत्री ने कहा था कि सालाना 5 लाख रुपये से ज्यादा प्रीमियम वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का मैच्योरिटी अमाउंट टैक्सेबल होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के इस ऐलान से इंश्योरेंस कंपनियों को भी बड़ा झटका लगा था। इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी।

1 अप्रैल, 2023 से पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP छोड़कर) की मैच्योरिटी पर बोनस सहित मिलने वाली पूरी रकम इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री होती थी। सिर्फ एक शर्त यह थी कि पॉलिसी की अवधि के दौरान चुकाया जाने वाला कुल प्रीमियम पॉलिसी के सम-एश्योर्ड के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

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ULIP पॉलिसीज पर भी पहले टैक्स-छूट मिलती थी। लेकिन इसे फाइनेंस एक्ट, 2021 में खत्म कर दिया गया था। अब नियम यह है कि सिर्फ व्यक्ति की मौत की स्थिति को छोड़कर 1 फरवरी, 2021 को या उसके बाद जारी की गई यूलिप पॉलिसी का प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो उस पर टैक्स लगेगा। अगर एक से ज्यादा पॉलिसीज हैं तो उन सभी पॉलिसीज का प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से कम होना चाहिए।

बजट 2023 में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स एग्जेम्प्शन वापस लेने की एक बड़ी वजह थी। दरअसल कई अमीर लोग इस एग्जेम्प्शन का दुरूपयोग कर रहे थे। सेक्शन 10(10D) के तहत मिलने वाले इस एग्जेम्प्शन का फायदा उठाने के लिए वे ज्यादा प्रीमिमय वाली पॉलिसी को खरीदते थे। फिर, पॉलिसी के मैच्योरिटी अमाउंट पर वे एग्जेम्प्शन क्लेम करते थे। इस दुरूपयोग को रोकने के लिए वित्तमंत्री ने एग्जेम्प्शन हटाया था।

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