फार्मा कंपनियों ने जरूरी दवाओं पर जीएसटी घटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे लोगों को फायदा होगा। उन्होंने 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले सरकार को अपनी मांग के बारे में बताया है। ऑर्गेनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल्स प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (OPPI) के डायरेक्टर जनरल अनिल मताई ने इस बारे में सीएनबीसी-टीवी18 को बताया। उन्होंने जीवन-रक्षक दवाओं पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर देनी चाहिए। दवाओं को लग्जरी नहीं माना जा सकता। इसलिए जीवन-रक्षक दवाओं पर लोगों को ज्यादा टैक्स चुकाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर निवेश बढ़ाने की भी जरूरत बताई।
ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर 2013 के मुताबिक, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) जरूरी दवाओं की कीमतें नियंत्रित करती है। यह सरकार की संस्था है। नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसीन (NELM) की लिस्ट में 870 दवाइयां शामिल हैं। अप्रैल 2023 में 651 दवाओं की कीमतों के लिए सीमा तय थी। मताई ने कहा कि फार्मा इंडस्ट्री के लिए 2030 तक 200 अरब डॉलर का टारगेट तय है। यह महत्वाकांक्षी है लेकिन इसे हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सरकार को उन मसलों पर ध्यान देने की सलाह दी जिनसे रेगुलेटरी इनवायरमेंट में बदलाव आ सकता है। उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए उपाय करने की भी मांग की।
इनोवेशन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अब तक इंक्रीमेंटल इनोवेशन पर जोर रहा है। लेकिन, इंडिया में वॉल्यूम सप्लायर की जगह वैल्यू चेन में ऊपर जाने पर जोर देने की जरूरत है। इसके लिए बेहतर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) प्रोटेक्शन के रास्ते तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि आईपी प्रोटेक्शन के बगैर डिसरप्टिव इनोवेशन लेकर आने वाली कंपनी के लिए किसी तरह का इनसेंटिव नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां अपने रेवेन्यू का 15-20 फीसदी R&D पर खर्च करती हैं। जब कोई नई दवा विकसित की जाती है तो उसके लॉन्च से पहले 15-20 साल लग जाते हैं।
उन्होंने बताया कि पेटेंट के लिए बाकी बचे 7-8 सालों के लिए सरकार को कंपनी के रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट (ROI) का ध्यान रखना होता है। इसकी वजह यह है कि कंपनी आरएंडडी पर करोड़ों डॉलर खर्च करती है। इंडिया में मौजूद ग्लोबल कंपनियों को इसे अपनी ग्लोबल पेरेंट कंपनियों के लिए अट्रैक्टिव बनाने की जरूरत है। इंडिया से निर्यात होने वाली दवाओं से जुड़ी निगेटिव खबरों के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से इंडिया में क्वालिटी को लेकर स्टैंडर्ड बढ़ाने की जरूरत का पता चलता है।