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Economic Survey: आर्थिक सर्वे क्या होता है? जानें इसकी खासियत और संसद में पेश किए जाने की तारीख

आम बजट से ठीक पहले संसद में एक और महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट पेश किया जाना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बताने के लिए लिहाज से बेहद अहम है। इस डॉक्यूमेंट को आर्थिक सर्वे या इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) कहते हैं। यह भारत सरकार की ओर से सालाना पेश किया जाने वाला एक डॉक्यूमेंट है

Curated By: Vikrant singhअपडेटेड Jan 21, 2023 पर 6:35 PM
Economic Survey: आर्थिक सर्वे क्या होता है? जानें इसकी खासियत और संसद में पेश किए जाने की तारीख
आर्थिक सर्वे 2023: भारत का पहला आर्थिक सर्वे 1950-51 में प्रस्तुत किया गया था।

Economic Survey: देश को अगले कुछ दिनों में बजट 2023 के पेश होने का इंतजार है। विभिन्न इंडस्ट्रियों और नागरिक समूहों ने बजट को लेकर अपनी उम्मीदों और अंकाक्षाओं को पहले ही विभिन्न माध्यमों के जरिए सरकार तक पहुंचा दिया है। अब सभी की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को बजट 2023-24 (Union Budget 2023-24) पेश करेंगी। हालांकि आम बजट से ठीक पहले संसद में एक और महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट पेश किया जाना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बताने के लिए लिहाज से बेहद अहम है। इस डॉक्यूमेंट को आर्थिक सर्वे या इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) कहते हैं। यह भारत सरकार की ओर से सालाना पेश किया जाने वाला एक डॉक्यूमेंट है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

आर्थिक सर्वे क्या है?

यूनियन बजट की तरह, आर्थिक सर्वे को भी केंद्रीय वित्त मंत्रालय तैयार करता है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के पास इस सर्वे को तैयार करने का जिम्मा होता है। इसे भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। आर्थिक सर्वे को बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। आमतौर पर इसे केंद्रीय बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है। इस साल संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होगा और 6 अप्रैल को समाप्त होगा।

Economic Survey का उद्देश्य क्या है?

आर्थिक सर्वे से भारतीय इकोनॉमी की स्थिति का पता चलता है। भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सभी आंकड़ों का यह आधिकारिक स्रोत होता है। आर्थिक सर्वे में सरकार पिछले एक साल के भारतीय अर्थव्यस्था से जुड़े आंकड़ों को पेश करती है। साथ ही इसमें सरकार के समक्ष मौजूद प्रमुख आर्थिक चुनौतियों और उनके संभावित समाधान के बारे में बताया जाता है। ये आंकड़ों ने केवल भविष्य की पॉलिसी बनाते समय जरूरी फैसले लेने का आधार देती है। बल्कि ये विभिन्न सेक्टर्स के आंकड़ों के जरिए पिछले फैसलों के प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करती हैं।

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