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क्या बजट बॉटम बनाएगा!

सरकार बैंकों में बड़ा निवेश करती है तो बाजार में तेजी आएगी ही, आपकी ईएमआई भी कम होगी।

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 24, 2016 पर 11:47 AM
क्या बजट बॉटम बनाएगा!

प्रदीप पंड्या
बैंकिंग एडिटर, सीएनबीसी-आवाज

पिछले साल बजट के बाद से लगातार बाजार मे गिरावट आई है, हालांकि इसके पीछे सरकार या वित्त मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार की ओर से सुधार के तमाम प्रयास लगातार किए गए हैं लेकिन दुनिया भर में मची अफरातफरी के बीच सारी कवायद बेनतीजा नजर आती है। सरकार ने कोयले का उत्पादन तो बढ़ा दिया लेकिन बिजली के खरीदार ही नदारद हैं। राज्य सरकारें जिस दाम पर बिजली खरीदती हैं उससे कम दाम पर सप्लाई करती हैं यानि हर यूनिट पर नुकसान। तो बिजली की कटौती के चलते जनता भले ही त्राहि-त्राहि करे तो करे लेकिन सरकार के लिए कम बिजली की खपत का मतलब है कम नुकसान। अब बिजली क्षेत्र के सुधार के लिए सरकार ने उदय योजना बनाई है लेकिन कई राज्य इससे जुड़ने में टालमटोल कर रहे हैं। कहने का मतलब ये है कि दिल्ली में बैठे वित्त मंत्री के हाथ में कोई जादू की छड़ी तो है नहीं जिसको घुमाया और देश के कोने कोने में विकास होने लगा।
 
ऐसे में अगर मुझसे पूछा जाय कि ऐसा एक काम क्या है जो वित्त मंत्री को जरुर करना चाहिए तो मेरा मानना है कि उन्हें सरकारी बैंकों में बड़ा पूंजी निवेश करना चाहिए। सरकार अगर बैंक में एक रुपये का निवेश करती है तो बैंक इसके सामने एफपीओ के जरिए 1 रुपये और उठा सकते हैं। दो रुपए की कैपिटल पर बैंक 22 रुपये का कर्ज दे सकते हैं, और 6 रुपये के सरकारी बांड खरीद कर सरकार को भी कर्ज उठाने में मदद कर सकते हैं। ये सारा गणित कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो और एसएलआर के नियमों को देखते हुए किया गया है। अब इस एक रुपये को 10 हजार करोड़ कर दीजिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज और 60 हजार करोड़ रुपये के सरकारी घाटे की फंडिंग का इंतजाम हो सकता है। अगर सरकार बैंकों में बड़ा निवेश करती है तो न केवल बाजार में तेजी आएगी, आपकी ईएमआई भी कम हो जाएगी।
 
वहीं एक चीज जिसका बाजार को सबसे ज्यादा डर है वह है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स की परिभाषा में बदलाव। फिलहाल आयकर का कानून ऐसा है कि अगर आप कोई शेयर या इक्विटी फंड एक साल के लिए रखते हैं और फिर बेच देते हैं तो आपका मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेऩ माना जाता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता। ऐसी चर्चा चल रही है कि लॉन्ग टर्म की परिभाषा में एक साल को तीन साल किया जा सकता है। अगर ये कदम उठाया गया तो फिर बजट की दूसरी सारी अच्छी बातें बेमानी हो जाएंगी और बाजार तेज गिरावट की चपेट में आ जाएगा।

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