चीन (China) के लोकल मार्केट में अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का भाव तेजी से बढ़ रहा है। पिछले एक महीने के दौरान चीन में अमेरिकी डॉलर को उधार लेना महंगा हुआ है। यह एक तरह जहां अमेरिकी करेंसी की पूरी दुनिया में फिर से बढ़ती अहमियत को दिखाता है। वहीं दूसरी ओर यह चीन की करेंसी युआन (Yuan) के सामने लगातार आ रही मुश्किलों को भी दिखाता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का ओवरनाइट इंटरबैंक डॉलर लेडिंग रेट बीते 29 मार्च को रिकॉर्ड 5.47% पर पहुंच गया था। गुरुवार 11 अप्रैल को यह 5.42% पर था। इसके साथ ही अमेरिकी सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंस रेट के साथ इसका अंतर जुलाई के बाद सबसे अधिक हो गया है।
सिर्फ चीन में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इस साल डॉलर की वैल्यू में तेजी देखी जा रही है। इस बीच अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व भी ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर रहा है। अगर यह ट्रेंड बना रहता है, तो डॉलर की लिक्विडिटी को बनाए रखने के साथ-साथ युआन पर दबाव को कम करने के उपाय उठाने पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंक ग्रुप के सीनियर स्ट्रैटजिस्ट, झाओपेंग जिंग ने कहा, "डॉलर की लिक्विडिटी के लिए सप्लाई और डिमांड के बीच असंतुलन का संकेत, युआन पर दबाव की ओर इशारा करता है।" उन्होंने कहा, "ऐसी संभावना है कि चीन का केंद्रीय बैंक PBOC, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व रिक्वायरमेंट रेशियो में कुछ कटौती करके डॉलर की लिक्विडिटी को बढ़ा सकता है।"
चीन का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व फिलहाल 3.2 लाख करोड़ ड़ॉलर का है। हालांकि इसके बावजूद चीनी कंपनियां और बैंक कितनी विदेशी मुद्राएं ले सकते हैं, यह कई चीजों पर निर्भर करता है। इसमें चीन के बड़े सरकारी बैंकों की ओर सप्लाई भी शामिल है।
चीन ने अपनी करेंसी को मजबूत करते के लिए कुछ जरूरी रेशियो में 2022 के बाद से तीन बार कटौती की है। ये रेशियो तय करते हैं कि बैंकों को कितनी मात्रा में फॉरेंस करेंसी डिपॉजिट को रिजर्व के तौर पर होल्ड करना होगा। ऐसी आखिरी कटौती पिछले साल सितंबर में हुई थी।
रुपया शुरुआती कारोबार में सात पैसा लुढ़का
इस बीच भारतीय रुपया शुक्रवार 12 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में सात पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 83.38 पर आ गया। वहीं 6 प्रमुख करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को परखने वाला डॉलर इंडेक्स 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105.35 पर कारोबार कर रहा था।