IT सर्विसेज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) के एंप्लॉयीज को सैलरी हाइक के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। कंपनी अपने ज्यादातर कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी 2025 की दूसरी छमाही यानि कि जुलाई-दिसंबर में करने की योजना बना रही है। लेकिन मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता के बीच अभी तक कोई टाइमलाइन तय नहीं की गई है। यह बात कॉग्निजेंट के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) जतिन दलाल ने कही है।
कॉग्निजेंट आमतौर पर 1 अगस्त से अपना इंक्रीमेंट सीजन शुरू करती है, लेकिन इस बार कंपनी ने देरी के संकेत दिए हैं। 31 जुलाई को अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, जतिन दलाल ने कहा, "मौजूदा मैक्रो एनवायरमेंट और उससे जुड़ी अनिश्चितता को देखते हुए, हमने अभी तक वेतन बढ़ोतरी पर कोई फैसला नहीं लिया है। हमारी कोशिश है कि जब भी हम फैसला लें, इस साल की दूसरी छमाही के दौरान अपने ज्यादातर कर्मचारियों को सैलरी हाइक के तहत कवर करें।"
जून तिमाही में जोड़े 7500 कर्मचारी
Cognizant में कर्मचारियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2025 तिमाही में लगभग 7500 कर्मचारियों को जोड़ा। इसमें एक बड़ा हिस्सा भारत में हायर किए गए कर्मचारियों का रहा। कॉग्निजेंट जनवरी-दिसंबर वित्त वर्ष फॉलो करती है। कंपनी में अब 343,800 कर्मचारी हैं। एट्रिशन रेट यानि कि कंपनी को छोड़कर जाने की दर सालाना आधार पर घटकर 15.2 प्रतिशत रह गई। यह मार्च तिमाही से 60 बेसिस पॉइंट्स कम है। कॉग्निजेंट 2025 में लगभग 15000-20000 फ्रेशर्स को हायर करने की भी योजना बना रही है।
कॉग्निजेंट का मुनाफा 14 प्रतिशत बढ़ा
कॉग्निजेंट का जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 5.25 अरब डॉलर हो गया। रेवेन्यू में लगातार चौथी तिमाही बढ़ोतरी रही। शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 64.5 करोड़ डॉलर हो गया। मुनाफा उम्मीदों से अच्छा रहा। कंपनी को 2025 की तीसरी तिमाही यानि कि जुलाई-सितंबर में रेवेन्यू 4.6-6.1 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 5.27-5.35 अरब डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है। पूरे साल 2025 के लिए रेवेन्यू 4.7-6.7 प्रतिशत बढ़कर 20.7-21.1 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है।
वैश्विक स्तर पर IT इंडस्ट्रीज कई मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियों का सामना कर रही है। जैसे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी फैसले, जिनसे ग्लोबल ट्रेड में उथल-पुथल मचने का खतरा है। इसके चलते आईटी कंपनियों के क्लाइंट्स के लिए अपनी तकनीकी बजट योजनाओं पर फैसला लेना मुश्किल हो रहा है। 30 जुलाई को ट्रंप ने भारतीय सामान के अमेरिका में आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की। साथ ही रूसी तेल और हथियार की खरीद को लेकर भारत पर पेनल्टी भी लगाई।