लेनदारों (क्रेडिटर्स) ने इंसॉल्वेंसी लॉ के तहत 1,119 मामलों का निपटारा कर 3.58 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी की है। रिकवरी का यह आंकड़ा 31 दिसंबर 2014 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक है। कंपनी मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने 11 फरवरी को राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया के हवाले से यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि लिक्विडेशन ऑर्डर के जरिये कुल 2,707 मामलों का निपटारा भी हुआ।
मंत्री ने लिखित जवाब में बताया, ' इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) द्वारा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक 1,119 मामलों में रिजॉल्यूशन प्लान देखने को मिला और इन मामलों के जरिये क्रेडिटर्स के लिए 3.58 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी हुई।' इसके अलावा, 1,274 मामलों में फाइनल रिपोर्ट भी सबमिट की गई है, जिसमें क्रेडिटर्स ने 0.13 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी की है।
मंत्री के मुताबिक, इस मामले में माफ की गई या छोड़ दी गई रकम के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया, ' इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत वसूली की प्रोसेस मार्केट आधारित है और बहुत सारी चीजों के अलावा यह रिजॉल्यूशन के वक्त क्वॉलिटी ऑफ एसेट्स पर निर्भर करती है। लिहाजा, निपटारा संबंधी राशि को लेकर कोई सीमा तय नहीं की गई है।' इसके अलावा, IBC प्रोसेस के तहत बैंकों द्वारा वसूली का डेटा भी मेंटेन नहीं किया गया है।