लॉजिस्टिक्स कंपनी डेल्हीवेरी (Delhivery) ने गो फर्स्ट (Go First) पर दिवालिया याचिका दाखिल करने से ठीक पहले उससे जानबूझकर पैसे लेने का आरोप लगाया है। डेल्हीवेरी (Delhivery) गो फर्स्ट (Go First) की दिवालिया याचिका मामले में दाखिल अपने आवेदन में कहा कि एयरलाइन को पता था कि वह स्वैच्छिक दिवालियपन के लिए आवेदन करने जा रही है, इसके बावजूद उसने जानबूझकर उनसे पैसे लिए। डेल्हीवेरी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के सामने अपने आवेदन में कहा कि, एयरलाइन ने घरेलू कॉर्गो कंसाइनमेंट से जुड़ी सेवाएं देने के लिए उससे करीब 1.58 करोड़ रुपये लिए थे, लेकिन उसने इस पर कभी कोई एक्शन नहीं लिया।
इन पैसों का भुगतान 2020 में डेल्हीवेरी और गो फर्स्ट के बीच हुए समझौके के आधार पर किया गया था, जिसे अगस्त 2022 में रिन्यू किया गया था। मनीकंट्रोल ने डेल्हीवेरी की ओर से दाखिल याचिका को देखा है। इसमें कहा गया है कि Go First ने दिवालिया याचिका दाखिल करने वाले दिन यानी 2 मई को उससे 57 लाख रुपये थे, जबकि उसे भली-भांति पता था कि वह इस भविष्य में इस सेवा को पूरा नहीं कर पाएंगी।
याचिका में कहा गया है, "गो फर्स्ट का इकलौता मकसद दिवालिया प्रक्रिया को हाइजैक कर डेल्हीवेरी को नुकसान कराना था। यह कानूनी प्रक्रियाओं को दुरुपयोग है।"
याचिका के मुताबिक, गो फर्स्ट को कम से कम 28 अप्रैल से अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में पता था और इस दिन से इसने उन डॉक्यूमेंट को तैयार करना शुरू कर दिया था, जिसे NCLT के सामने सौंपा जाना था।
याचिका में आगे कहा गया है कि गो फर्स्ट के बोर्ड ने 30 अप्रैल स्वैच्छिक दिवालिया याचिका दाखिल करने के लिए एक स्पेशल प्रस्ताव को मंजूरी दी। हालांकि एयरलाइन ने इसके बावजूद 2 मई को 57 लाख रुपये लिए, जबकि उसे पता था कि वह भविष्य में इसे पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने एयरलाइन पर भरोसा करके पेमेंट किया, लेकिन अब उन्हें अपने पैसे वापस मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
डेल्हीवेरी ने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने धोखाधड़ी और गलत तरीके से पैसा हासिल किया है। डेल्हीवरी के मुताबिक, उन्हें अब केवल एयरलाइन पर भरोसा करने और भुगतान करने के लिए आईआरपी के अपने पैसे वापस मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि गो फर्स्ट की दिवालिया याचिका पूरी तरह से इसके लेनदारों को बकाया वसूली करने से रोकने के लिए उठाया गया कदम है। ताकि लेनदार एयलाइन के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही न कर सकें। डेल्हीवेरी ने कहा, 'यह कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके कानून को खत्म करने का एक बेशर्म प्रयास है।'