Dolo 650: 2 रुपये की टैबलेट के लिए डॉक्टरों को दिए 1,000 करोड़ के गिफ्ट, फार्मा कंपनी को अब SC में देना पड़ सकता है जवाब

जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसे 'गंभीर मामला' करार देते हुए कहा कि 29 सितंबर को मामले की फिर से सुनवाई होगी। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को 10 दिनों में याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा

अपडेटेड Aug 19, 2022 पर 2:05 PM
DOLO- 650 टैबलेट एक एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) और एंटी-पायरेटिक (बुखार कम करने वाली) दवा है

एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को अवगत कराया कि सेंट्रल बोर्ड फॉर डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने डोलो (DOLO) टैबलेट बनाने वाली चर्चित फार्मा कंपनी द्वारा बुखार के इलाज के लिए डोलो 650 मिग्रा (Dolo-650 mg tablet) का नुस्खा लिखने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार बांटने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आरोप को ‘गंभीर मुद्दा’ करार दिया।

फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सेंट्रल बोर्ड फॉर डायरेक्ट टैक्स ने फार्मा कंपनी पर डोलो टैबलेट (जो बुखार कम करने वाली दवा है) की 650mg की डोज निर्धारित करने के लिए के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार वितरित करने आरोप लगाया है।

याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख और वकील अपर्णा भट ने जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना की पीठ को बताया कि 500 मिग्रा तक के किसी भी टैबलेट का बाजार मूल्य सरकार की कीमत नियंत्रण प्रणाली के तहत नियंत्रित होता है।


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उन्होंने बताया कि लेकिन 500 मिग्रा से ऊपर की दवा की कीमत निर्माता फार्मा कंपनी द्वारा तय की जा सकती है। उन्होंने दलील दी कि उच्च लाभ हासिल सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने डोलो-650 मिग्रा टैबलेट के नुस्खे लिखने के लिए डॉक्टरों में मुफ्त उपहार बांटे हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘आप जो कह रहे हैं वह सुनने में सुखद लगता है। यही दवा है जो मैंने कोविड होने पर ली थी। यह एक गंभीर मुद्दा है और हम इस पर गौर करेंगे।’’

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को 10 दिनों में याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा और इसके बाद पारिख को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।

इस बीच एक वकील ने फार्मा कंपनियों की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर करने की सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने मंजूर कर लिया। पीठ ने कहा कि वह भी इस मुद्दे पर फार्मा कंपनियों का पक्ष सुनना चाहेगी।

सुप्रीम कोर्ट केंद्र को फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस (कोड) के समान कोड को वैधानिक आधार देने और निगरानी तंत्र, पारदर्शिता, जवाबदेही के साथ-साथ उल्लंघन के परिणामों को सुनिश्चित करके इसे प्रभावी बनाने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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