US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल

US Fed News: पश्चिमी एशिया में जंगी माहौल के बीच जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था, उसी प्रकार अमेरिकी फेड ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि ब्याज दरों को लेकर आगे क्या फैसला हो सकता है, इसे लेकर जो संकेत मिले हैं, उस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह हो सकता है, यकीन करना मुश्किल है। डिटेल्स में पढ़ें

अपडेटेड Jun 18, 2026 पर 8:16 AM
3.8% की टारगेट से अधिक इंफ्लेशन और ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने को लेकर ट्रंप के समझौते के आसपास बनी अनिश्चितता के चलते अमेरिकी फेड की दरों को तय करने वाली कमेटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया।

US Fed News: अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने अपने बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा। फेड ने यह फैसला केंद्रीय बैंक के प्रमुख के रूप में केविन वार्श की पहली बैठक के बाद लिया। हालांकि बैठक में सभी गवर्नर्स के बीच इसे स्थिर रखा जाए या महंगाई की रफ्तार पर काबू रखने के लिए इसे बढ़ाया जाए, इस बात को लेकर काफी चर्चा हुई। बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ने महंगाई की रफ्तार तेज की है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति केविन वार्श से पहले के चेयरमैन जेरोम पॉवेल पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बना रहे थे और उन्होंने उम्मीद जताई थी कि केविन वार्श उनकी मांग पूरी करेंगे। अब अमेरिकी फेड के दरों को स्थिर रखने के फैसले पर ट्रंप का कहना है कि ठीक है, जो भी हो लेकिन ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर उन्होंने कहा कि यह यकीन करना मुश्किल है और यह देश के विकास को रोकता है।

US Fed ने क्यों नहीं घटाई ब्याज दर


3.8% की टारगेट से अधिक इंफ्लेशन और ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने को लेकर ट्रंप के समझौते के आसपास बनी अनिश्चितता के चलते अमेरिकी फेड की दरों को तय करने वाली कमेटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। FOMC (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) के 12 सदस्यों ने अपने बयान में कहा कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत रफ्तार से बढ़ रही हैं, लेकिन अनिश्चितता अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिसका एक वहज तो पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई है।

इस साल बढ़ेगी ब्याज दर?

अमेरिकी फेड ने इस बार जो बयान जारी किया है, उसमें एक प्वाइंट ये है कि इसमें से उस संकेत को हटा दिया गया है, जिसमें आने वाले समय में ब्याज दरें हल्की करने का संकेत दिया गया था। दर तय करने वाली प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले 18 सेंट्रल बैंकर्स में से 9 ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार जताई तो सिर्फ एक ने कटौती की संभावना जताई और बाकी 8 का मानना है कि दरें मौजूदा स्तर पर बनी रहेंगी।

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