पहली सैलरी ही बनी आखिरी, IT जॉब के नाम पर बड़ा फ्रॉड; जानिए कैसे चल रहा था ठगी का ये पूरा खेल

IT Job Scam: IT जॉब के नाम पर चल रहे बड़े फ्रॉड में सैकड़ों युवा फंस गए। लाखों रुपये देकर नौकरी मिली, लेकिन सैलरी बंद हो गई। जानिए कैसे ‘पैसे देकर जॉब’ मॉडल ने लोगों को कर्ज और बेरोजगारी में धकेल दिया। जानिए कैसे चल रहा था ठगी का ये पूरा हायरिंग रैकेट।

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 4:47 PM
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IT Job Scam: 27 साल की सृष्टि (बदला हुआ नाम) दो साल से बेरोजगार थीं। वह हर जगह जॉब तलाश रही थीं। पिछले साल सितंबर में उनके पास किसी हायरिंग कंसल्टेंट का कॉल आया। सृष्टि को लगा कि अब उनकी किस्मत बदल सकती है।

सृष्टि को QuantumSoft नाम की एक आईटी कंपनी में नौकरी का ऑफर मिला। यह कंपनी पुणे के टेक सर्कल में ज्यादा जानी-पहचानी नहीं थी। लेकिन हालात ऐसे थे कि सृष्टि ने उस मौके को लपकने में भलाई समझी। सृष्टि से कहा गया कि 6 लाख रुपये सालाना पैकेज के लिए फीस देनी होगी और ज्यादा पैसे देने पर 11 लाख तक का पैकेज मिल सकता है।

सृष्टि ने बड़ा पैकेज चुना और करीब 2.75 लाख रुपये पहली किस्त के तौर पर दे दिए। अक्टूबर में उसने जॉइन किया। ट्रेनिंग शुरू हुई और एक महीने बाद सैलरी भी मिली। लेकिन वही पहली सैलरी आखिरी भी साबित हुई। इसके बाद हर महीने सैलरी स्लिप तो बनती रही, लेकिन पैसे नहीं आए।


जनवरी में जब सृष्टि ने हायरिंग कंसल्टेंट से पैसे वापस मांगे, तो उनसे कहा गया कि पहले इस्तीफा देना होगा, तभी रिफंड मिलेगा। अब तक सृष्टि करीब 1.45 लाख रुपये ही वापस मिले हैं, बाकी पैसे अभी भी अटके हुए हैं।

सिर्फ सृष्टि नहीं, सैकड़ों लोग हुए शिकार

यह मामला सिर्फ किसी इकलौते शख्स का नहीं है। पुणे में सैकड़ों आईटी प्रोफेशनल्स ने ऐसी ही शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि कई छोटी टेक कंपनियां और कंसल्टेंट नौकरी दिलाने के नाम पर भारी फीस लेते हैं, लेकिन या तो नौकरी नहीं देते या वादा पूरा नहीं करते।

ये मामले अब पुलिस जांच में हैं और इससे एक पैटर्न सामने आया है- नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेना और बाद में सैलरी न देना। इससे कई कर्मचारियों का एक्सपीरियंस बेकार हो गया और उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।

महाराष्ट्र के यवतमाल के 25 साल के ध्रुव की कहानी भी ऐसी ही है। 2022 में ग्रेजुएशन के बाद वह दो साल से ज्यादा समय तक नौकरी नहीं ढूंढ पाए थे। अक्टूबर 2025 में QuantumSoft का ऑफर मिलने पर उन्हें लगा कि बड़ा मौका मिल गया है।

ध्रुव ने बताया, 'मुझे एक जॉब पोर्टल के जरिए कंसल्टेंट ने संपर्क किया। 6 लाख के पैकेज के लिए मुझे करीब 3 लाख रुपये देने पड़े। ये पैसे मैंने रिश्तेदारों और लोन से जुटाए।'

ध्रुव और सृष्टि उन करीब 100 कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने पुणे के विमन नगर पुलिस स्टेशन में QuantumSoft के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वहीं 300 से ज्यादा लोग भी शिकायत करने की तैयारी में हैं।

पुणे के दूसरे हिस्से में Flynaut SaaS के खिलाफ हिंजेवाडी पुलिस स्टेशन में 354 से ज्यादा FIR दर्ज हो चुकी हैं। कुल मिलाकर 600 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हुए हैं और शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

वहीं DataTech Labs के खिलाफ भी शिकायतें सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने कुछ कर्मचारियों को सैलरी दी है, लेकिन करीब 60 लोग अभी भी अपने पैसे का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस इन सभी मामलों की जांच कर रही है और अभी कोई अंतिम नतीजा नहीं निकला है।

कैसे चलता था पूरा खेल?

जांच में सामने आया है कि कंपनियां कंसल्टेंट्स के जरिए भर्ती करती थीं। ये कंसल्टेंट उम्मीदवारों से 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक लेते थे और यह पैसा कंपनी के साथ बांटा जाता था। FITE के मुताबिक, करीब 30 कंसल्टेंट और एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा थीं।

निशाना ज्यादातर छोटे शहरों के 2022-24 बैच के युवा थे- जैसे यवतमाल, अमरावती, नागपुर और अहमदनगर। इनमें BSc IT, MCA या इंजीनियरिंग करने वाले छात्र शामिल थे, जिन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी।

हालांकि सिर्फ फ्रेशर्स ही नहीं, बल्कि करियर ब्रेक वाले अनुभवी प्रोफेशनल्स को भी निशाना बनाया गया। कंसल्टेंट्स जॉब पोर्टल्स या रेफरल के जरिए संपर्क करते थे।

FITE के अध्यक्ष पवनजीत माने ने कहा कि कम से कम 30 कंसल्टेंट इसमें शामिल हैं और उन्हें पूरे खेल की जानकारी थी। उनके मुताबिक, इन लोगों की जांच होनी चाहिए और पैसों के सोर्स का पता लगाया जाना चाहिए।

फर्जी इंटरव्यू और झूठे वादे

Flynaut में शामिल एक MCA फ्रेशर ने बताया कि उसे 'डिस्काउंट' देकर 4 लाख पैकेज के लिए करीब 1.9 लाख रुपये लिए गए, जबकि बाकी लोगों से ज्यादा पैसे लिए गए थे। उसने कहा कि इंटरव्यू सिर्फ दिखावा था। मुश्किल से कोई तकनीकी सवाल पूछा गया और लगभग सभी उम्मीदवारों को नौकरी दे दी गई, बस पैसे देने थे।

जॉइन करने के बाद कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई, लेकिन असली प्रोजेक्ट नहीं दिए गए। टेस्ट के नाम पर बार-बार फेल किया गया और धीरे-धीरे सैलरी भी बंद कर दी गई। जब कर्मचारियों ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके कॉल और ईमेल तक ब्लॉक कर दिए गए।

कंपनियों पर गंभीर आरोप

कर्मचारियों का आरोप है कि इन कंपनियों के पास असली प्रोजेक्ट नहीं थे और वे नए कर्मचारियों से ली गई फीस से ही अपना खर्च चला रही थीं।

  • PF अकाउंट बनाए गए, लेकिन उसमें पैसा जमा नहीं किया गया।
  • हेल्थ इंश्योरेंस का वादा पूरा नहीं हुआ।
  • महीनों तक सैलरी नहीं दी गई।
  • सवाल पूछने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

इस मामले में कई कंपनी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। सैकड़ों शिकायतों में करोड़ों रुपये की ठगी की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, कर्मचारियों से लिए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी के काम में नहीं, बल्कि निजी खर्चों में किया गया। जैसे कि गहने, गाड़ियां और फ्लैट खरीदना।

कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल

  • इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान कर्मचारियों का हुआ है।
  • कई महीनों का अनुभव बेकार हो गया।
  • नई नौकरी मिलने में दिक्कत हो रही है।
  • PF अकाउंट की वजह से बैकग्राउंड चेक में समस्या आ रही है।
  • कई लोगों ने लोन लिया या गहने बेचकर पैसे जुटाए थे।

DataTech Labs का पक्ष

DataTech Labs के CEO अमित आंद्रे ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ये आरोप गलत और कंपनी की छवि खराब करने के लिए लगाए गए हैं। कंपनी सभी नियमों का पालन करती है और सही प्रक्रिया के तहत काम करती है।

सरकार का दखल

यह मामला सिर्फ ठगी नहीं दिखाता, बल्कि आईटी सेक्टर की मौजूदा हालत भी बताता है। बड़ी कंपनियों ने हाल के वर्षों में हायरिंग कम कर दी है, जिससे छोटे शहरों के युवाओं के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने SIT बनाने का फैसला लिया है। साथ ही आईटी कर्मचारियों की शिकायतों के लिए अलग ट्रिब्यूनल बनाने की तैयारी की जा रही है।

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