भारत सरकार, इंडियन ऑयल जैसी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने की योजना बना रही है, जिससे ये कंपनियां फ्यूल की रिटेल बिक्री पर हुए नुकसान की आंशिक भरपाई कर सकें और रसोई गैस की कीमतों को भी नियंत्रित रखा जा सके। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मिनिस्ट्री ने 28,000 करोड़ के मुआवजे की मांग की है, लेकिन वित्त मंत्रालय केवल 20,000 करोड़ रुपये के नकद भुगतान के लिए सहमत है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बातचीत आखिरी चरण में है लेकिन अभी अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है।
देश में 90 फीसदी पेट्रोलियम उत्पादों की रिटेल बिक्री तीन सरकारी कंपनिया करती हैं, जिसमें इंडियन ऑयल (IOL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में बहुत अधिक उछाल आने के बाद काफी समय तक पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत नहीं बढ़ाने के चलते जून तिमाही में इन्हे काफी नुकसान उठाना है।
हालांकि सरकार की तरफ से यह मुआवजा मिलने से उनका नुकसान काफी हद तक कम हो सकता है। हालांकि यह सरकार के खजाने पर दबाव डालेगा जो पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में टैक्स घटाने और महंगाई के बढ़ते दबाव को रोकने के लिए फर्टिलाइजर पर भारी सब्सिडी दे रही है।
इस बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयर सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। इंडियन ऑयल के शेयरों में जहां 0.06 फीसदी की तेजी देखी गई। वहीं भारत पेट्रोलियम के शेयर 1.08 की उछाल के साथ बंद हुए। जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयरों में सबसे अधिक 1.28 फीसदी की बढ़त देखी गई।
सरकार ने 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2022 के लिए ऑयल सब्सिडी ₹5800 करोड़ तय की थी, जबकि फर्टिलाइजर पर सब्सिडी 1.05 लाख करोड़ आंकी गई थी।