GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम
GST Council Meeting: 57वीं GST काउंसिल बैठक में टैक्सपेयर्स और कारोबारियों के लिए कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। रिफंड तेज होगा, रजिस्ट्रेशन आसान होगा, जांच घटेगी और गिरफ्तारी की शक्ति हटेगी। जानिए छोटे कारोबारियों, एक्सपोर्टर्स और ई-कॉमर्स विक्रेताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।
57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया।
GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े प्रोसेस सुधारों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST को समझना और उसका पालन करना आसान बनाना है। साथ ही रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और टैक्स अधिकारियों का फिजिकल इंटरवेंशन कम किया जाएगा।
ये बदलाव GST के दो-दर वाले स्ट्रक्चर लागू होने के करीब एक साल बाद किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़कर हर महीने 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है। पहले यह 40.19 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, कंज्यूमर्स को रिपोर्ट की गई सप्लाई 26.7% बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
इस दौरान घरेलू सप्लाई पर प्रभावी टैक्स रेट भी घटा है। यह 14.55% से कम होकर 13.13% रह गया है। अब Council का फोकस टैक्स रेट से हटकर GST के रोजमर्रा के कामकाज पर है। इसमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, मुकदमे और टैक्स कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।
GST रिफंड अब तेजी से मिलेगा
सबसे बड़ा बदलाव रिफंड की प्रक्रिया में किया गया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। अगर 10 दिन के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट जारी होता है और न ही डेफिशिएंसी मेमो, तो क्लेम को अपने आप एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।
अब सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर रिफंड क्लेम की 90% रकम को मंजूर करेगा। इसमें अधिकारी की भूमिका कम होगी। एक्नॉलेजमेंट के तीन वर्किंग डे के भीतर रिफंड ऑर्डर जारी करना होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय है।
कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। इसमें अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा खासकर एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है। करीब 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट से जुड़े हैं, जबकि 19% क्लेम कैश लेजर में पहले से पड़े बैलेंस से जुड़े हैं।
GST रजिस्ट्रेशन भी ज्यादा ऑटोमैटिक होगा
GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को भी और ऑटोमैटिक करने का प्रस्ताव है। अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की मंजूरी के सिस्टम के जरिए तीन वर्किंग डे में रजिस्ट्रेशन मिल सकता है। कुल रजिस्ट्रेशन में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 61% है।
रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी बदला जाएगा। इसमें आवेदक को वही फील्ड दिखाई जाएंगी, जो उसके लिए जरूरी हैं। साथ ही, मांगे जा रहे दस्तावेजों का मकसद भी बताया जाएगा। इससे आवेदन भरने की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।
ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर और कारोबार की अतिरिक्त जगहों में बदलाव जैसे कई सामान्य संशोधन अपने आप मंजूर किए जाएंगे। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दाखिल 16.73 लाख रजिस्ट्रेशन अमेंडमेंट एप्लिकेशन में से 65.45% इन्हीं कैटेगरी से जुड़े थे।
Input Tax Credit में कारोबारियों को राहत
Council ने कई क्षेत्रों में Input Tax Credit यानी ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC मिल सकेगा। फैक्ट्री के बाहर लगे टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर भी इसका फायदा मिलेगा।
एक्सपायरी के कारण खराब स्टॉक पर भी ITC मिलेगा, अगर कानून के तहत उस सामान को नष्ट करना जरूरी है। फ्री सैंपल पर भी ITC उपलब्ध होगा। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके कारोबार में ऐसे खर्च नियमित रूप से होते हैं।
सरकार ने कुछ B2B सर्विस चेन में डबल टैक्सेशन रोकने की भी पहल की है। एजेंट के जरिए बुक किए गए 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर टैक्स दो बार लेने के बजाय एक बार ही लिया जाएगा।
इनवर्टेड ड्यूटी में ITC रिफंड का दायरा बढ़ेगा
मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी रिफंड सिर्फ गुड्स इनपुट तक सीमित है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर इनपुट सर्विसेज को भी रिफंड में शामिल किया जाएगा।
प्लांट और मशीनरी को रिफंड से बाहर रखने का नियम भी हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर प्लांट और मशीनरी के रिफंड की गणना हर महीने क्रेडिट के 1/60वें हिस्से के आधार पर होगी। यह अवधि उस एसेट की वर्किंग लाइफ से जुड़ी होगी।
इस बदलाव से फार्मा और FMCG जैसे सेक्टरों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण ITC लंबे समय तक फंसा रहता है, वहां रिफंड का दायरा बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिल सकती है।
छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न का विकल्प
काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ कंज्यूमर्स को सामान या सर्विस बेचने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत ऐसे कारोबारी साल में सिर्फ एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करना होगा।
सरकार के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव टैक्सपेयर्स में से 16.85 लाख सिर्फ कंज्यूमर सप्लाई रिपोर्ट करते हैं। इनमें 99% का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है। ये सभी मिलकर GST की कुल रिपोर्टेड देनदारी का 1% से भी कम हिस्सा रखते हैं।
इस स्कीम का पूरा फ्रेमवर्क और जरूरी कानूनी बदलाव अगली GST काउंसिल बैठक में देखे जाएंगे। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। इसके लागू होने से पहले इसके नियम और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
रास्ते में माल की जांच भी कम होगी
माल लेकर जा रहे वाहनों की फिजिकल जांच को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित हैं। किसी वाहन को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ कोई खास इंटेलिजेंस या सूचना हो। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से मंजूरी जरूरी होगी।
किसी गाड़ी में जा रहे माल की जांच सिर्फ सोर्स स्टेट और डेस्टिनेशन स्टेट कर सकेंगे। रास्ते में पड़ने वाले दूसरे राज्यों को वाहन रोकने की अनुमति नहीं होगी। इससे कारोबारियों को रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से राहत मिल सकती है।
यानी अगर कोई कंसाइनमेंट पांच राज्यों से होकर गुजरता है, तो अभी हर राज्य में उसकी जांच हो सकती है। नए सिस्टम में फिजिकल चेकिंग सिर्फ शुरुआत और अंतिम राज्य तक सीमित रहेगी। इससे सामान की आवाजाही में समय भी बच सकता है।
GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म होगी
GST से जुड़े प्रवर्तन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है। किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जाएगा।
इसके बाद जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा। जहां कोई खास पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी।
सरकार का कहना है कि अब GST सिस्टम खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान कर सकता है। इससे फर्जी ITC को उसी जगह के करीब पकड़ा जा सकता है, जहां वह बनाया जाता है। इसी वजह से सिस्टम में ज्यादा ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है।
सर्विस एक्सपोर्टर्स को भी फायदा
GST काउंसिल ने सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी विदेशी ब्रांच के जरिए किसी विदेशी ग्राहक को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके लिए मौजूदा कानूनी शर्त हटाई जाएगी।
इससे एनालिटिक्स कंपनियों, डिजाइन स्टूडियो, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और भारत से काम करने वाले ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस को फायदा हो सकता है। ऐसे कारोबारों के लिए विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस को एक्सपोर्ट मानने का रास्ता आसान होगा।
अगर किसी विदेशी ग्राहक के सामान पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग का काम किया जाता है, तो वह भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि वह सामान भारत से बाहर जाए।
ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए रास्ता आसान
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में कारोबार की जगह दर्ज करना आसान हो सकता है। प्रस्ताव के तहत कोई विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस घोषित कर सकेगा।
इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी सिस्टम के जरिए अपने आप दी जाएगी। हालांकि, विक्रेता की कम से कम एक राज्य में फिजिकल मौजूदगी बनी रहनी चाहिए। यही उसका होम स्टेट होगा।
यह रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक सीमित रहेगा। काउंसिल अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल में टैक्सेशन को भी एक जैसा करना चाहती है। यानी टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तव में कौन-सी सर्विस दी गई है, न कि प्लेटफॉर्म ने कॉन्ट्रैक्ट किस तरह बनाया है।
इस बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं
57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। आगे से GST रेट से जुड़े मामलों पर साल में एक बार अलग बैठक में चर्चा होगी। यह बैठक सिर्फ रेट से जुड़े मुद्दों के लिए होगी।
इस बार काउंसिल का फोकस पिछले साल के GST 2.0 बदलावों के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं को दूर करने पर रहा। यानी इस बैठक में टैक्स रेट बदलने के बजाय GST के रोजमर्रा के सिस्टम को आसान बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया।