Income Tax Bill 2025: सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट लोकसभा में पेश, कई बड़े बदलावों की सिफारिश
Income Tax Bill 2025: लोकसभा की सेलेक्ट कमेटी ने इनकम टैक्स बिल 2025 पर रिपोर्ट पेश की। इसमें कैपिटल एसेट, नॉन-प्रॉफिट संस्थाएं, MSME, TDS और पुराने कानूनों से जुड़े कई बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है। जानिए पूरी डिटेल।
MoneyControl News
अपडेटेड Jul 21, 2025 पर 5:22 PM
Income Tax Bill 2025: सेलेक्ट कमेटी को कुल 20,976 ऑनलाइन सुझाव मिले थे।
Income Tax Bill 2025: लोकसभा की सेलेक्ट कमेटी ने सोमवार, 21 जुलाई को इनकम टैक्स बिल 2025 (Income Tax Bill, 2025) पर अपनी रिपोर्ट सदन में पेश की। इस 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष बीजेपी नेता बैजयंत पांडा (Baijayant Panda) हैं। उन्होंने यह रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंपी। इसमें कई अहम सुझाव शामिल दिए हैं।
कमेटी ने इस प्रक्रिया में अलग-अलग हितधारकों को भी शामिल किया। इसमें टैक्सपेयर्स, बिजनेस, उद्योग संगठन और पेशेवर संस्थाओं से सुझाव मांगे गए। कुल 20,976 ऑनलाइन सुझावों में से उचित और जरूरी सुझावों को शामिल किया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने इस बिल को 13 फरवरी 2025 को संसद में पेश किया था। उसी दिन इसे विस्तृत परीक्षण के लिए सेलेक्ट कमेटी को सौंपा गया था। कमेटी से कहा गया था कि वह मानसून सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपे। आइए जानते हैं कि अपनी रिपोर्ट में कंपनी कौन-कौन से सुझाव दिए हैं।
बिल की क्लॉज-बाय-क्लॉज समीक्षा
सेलेक्ट कमेटी को इनकम टैक्स बिल के प्रत्येक क्लॉज की बारीकी से जांच करने और सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा गया था। रिपोर्ट में कमेटी ने मौजूदा टैक्स फ्रेमवर्क के साथ तालमेल बनाने, अस्पष्टताओं को दूर करने और परिभाषाओं को सटीक करने के लिए कई अहम बदलावों की सिफारिश की है।
‘कैपिटल एसेट’ की परिभाषा में संशोधन की सिफारिश
कमेटी ने ‘कैपिटल एसेट’ (Capital Asset) की परिभाषा को फाइनेंस एक्ट 2025 के अनुरूप अपडेट करने की सिफारिश की है। साथ ही, ‘इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल कंपनी’ (Infrastructure Capital Company) की स्पष्ट परिभाषा देने को कहा गया है ताकि पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के क्रॉस-रेफरेंस हटाए जा सकें।
गृह संपत्ति, खर्च और रिसर्च पर कटौतियों के नियम स्पष्ट हों
रिपोर्ट में गृह संपत्ति से होने वाली आय (House Property Income), खर्चों के वास्तविक भुगतान और वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) पर खर्च के मामलों में कटौती के नियमों को और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
MSME कानून से परिभाषाओं को जोड़ा जाए
कमेटी ने वित्त मंत्रालय को सुझाव दिया है कि माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (Micro and Small Enterprises) की परिभाषाओं को MSME एक्ट के अनुरूप बनाया जाए, ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।
‘पेरेंट कंपनी’ की परिभाषा को स्पष्ट करने की मांग
रिपोर्ट में ‘पेरेंट कंपनी’ (Parent Company) शब्द की स्पष्ट परिभाषा देने की मांग की गई है। कमेटी ने पूंजीगत लाभ (Capital Gains), नुकसान को आगे ले जाने (Carry-forward of Losses), पेंशन योजना में योगदान और चैरिटी में दान जैसे विषयों में कानूनी खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया है।
नॉन-प्रॉफिट संस्थानों को लेकर कई तकनीकी समस्याएं
रिपोर्ट में नॉन-प्रॉफिट संगठनों (Non-Profit Institutions) के लिए ‘आय’ और ‘प्राप्तियां’ (Income vs Receipts) में अंतर, बेनाम दान (Anonymous Donations), और ‘डीम्ड एप्लिकेशन’ (Deemed Application) की अवधारणा को लेकर भ्रम की स्थिति को दूर करने की सिफारिश की गई है। कमेटी का कहना है कि इन अस्पष्टताओं से अनजाने में टैक्स देनदारी या कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं।
TDS, रिफंड और पेनल्टी नियमों में बदलाव की सलाह
रिपोर्ट में एडवांस रूलिंग फीस, प्रोविडेंट फंड पर टीडीएस (TDS), कम टैक्स सर्टिफिकेट्स, पेनल्टी के अधिकार और छोटे करदाताओं द्वारा रिफंड के लिए दाखिल रिटर्न को लेकर भी सुधार की जरूरत बताई गई है।
1961 के कानून की सभी पुरानी धाराएं हटाने पर जोर
कमेटी ने सिफारिश की है कि पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 (Income Tax Act, 1961) से जुड़ी सभी रेफरेंस को पूरी तरह हटाकर नए कानून को स्पष्ट, आधुनिक और विवाद रहित बनाया जाए।
कमेटी की सिफारिशों का मकसद
कमेटी की सिफारिशों का उद्देश्य भारत की टैक्स प्रणाली को आधुनिक बनाना है, जिसमें पारदर्शिता, न्यायसंगत प्रक्रियाएं और कम से कम कानूनी विवाद हों। अब यह रिपोर्ट लोकसभा में चर्चा के लिए लाई जाएगी, जिसके बाद बिल को आगे बढ़ाया जाएगा।