अगस्त में कोर सेक्टर आउटपुट बढ़कर 6.3% हुआ, स्टील और कोयले ने दिखाया दम

अगस्त 2025 में भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ 6.3% रही। स्टील और कोयले ने मजबूती दिखाई, जबकि सीमेंट, उर्वरक और बिजली में भी सुधार दर्ज हुआ। लेकिन क्रूड ऑयल और गैस की कमजोरी अभी भी बड़ी चिंता है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Sep 22, 2025 पर 7:34 PM
Story continues below Advertisement
सीमेंट उत्पादन 6.1% बढ़ा, लेकिन जुलाई की डबल-डिजिट ग्रोथ से कमजोर रहा।

भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट अगस्त 2025 में तेज हुआ। आठ कोर इंडस्ट्रीज ने सालाना आधार पर 6.3% की ग्रोथ दर्ज की, जबकि जुलाई में यह दर 3.7% थी। स्टील अगस्त में सबसे मजबूत सेक्टर रहा, जिसकी ग्रोथ 14.2% रही। हालांकि यह जुलाई के 16.6% से थोड़ी कम है। कोयला उत्पादन में भी 11.4% की उछाल आई, जो पिछले साल की गिरावट के बाद बड़ी रिकवरी है।

सीमेंट, उर्वरक और बिजली में सुधार

सीमेंट उत्पादन 6.1% बढ़ा, हालांकि जुलाई की डबल-डिजिट ग्रोथ से कमजोर रहा। उर्वरक उत्पादन 4.6% बढ़ा। बिजली उत्पादन में 3.1% की बढ़ोतरी हुई और रिफाइनरी प्रोडक्ट्स में 3% का इजाफा दर्ज हुआ।


हालांकि, क्रूड ऑयल और गैस में कमजोरी बरकरार रही। क्रूड ऑयल उत्पादन अगस्त में भी गिरकर 1.2% घटा। नैचुरल गैस उत्पादन 2.2% घटा। अप्रैल से अगस्त की अवधि में दोनों सेक्टर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इससे भारत के अपस्ट्रीम एनर्जी सेक्टर की चुनौतियां साफ झलकती हैं।

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर असर

आठ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) ने अप्रैल-अगस्त 2025-26 के दौरान 2.8% की कुल ग्रोथ दर्ज की। ये इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का 40.27% हिस्सा है। यह धीमी लेकिन स्थिर रिकवरी का संकेत है।

अगस्त की रिकवरी भारत की औद्योगिक गतिविधियों के लिए अच्छा संकेत है। स्टील और कोयला सेक्टर की मजबूती बाजार को सहारा दे रही है। हालांकि एनर्जी सेक्टर की कमजोरी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कोर सेक्टर क्या है 

कोर सेक्टर यानी देश की आठ सबसे अहम इंडस्ट्रीज- कोयला, कच्चा तेल, गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, बिजली, स्टील, सीमेंट और उर्वरक। इन्हें 'कोर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि बाकी इंडस्ट्रीज और पूरी अर्थव्यवस्था इन पर काफी निर्भर रहती हैं।

जैसे स्टील और सीमेंट से बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बनते हैं। कोयला और बिजली से फैक्ट्रियां और घर चलते हैं, और पेट्रोल-डीजल जैसी चीजें ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के लिए जरूरी हैं। वहीं, उर्वरक खेती का हाल बताता है।

कोर सेक्टर ग्रोथ का मतलब

कोर सेक्टर की ग्रोथ बताती है कि इंडस्ट्रियल और आर्थिक गतिविधियां कैसी चल रही हैं। अगर ये सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं तो मतलब उत्पादन, खपत और निवेश बढ़ रहे हैं, जिससे रोजगार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अगर इनमें गिरावट आती है तो यह इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और जीडीपी पर असर डाल सकती है। इसलिए कोर सेक्टर को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

यह भी पढ़ें : IT Stocks Crash: आईटी शेयरों में कोहराम, एक दिन में ₹1 लाख करोड़ स्वाहा, इन 9 कंपनियों को सबसे अधिक झटका

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।