अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को छोड़कर बाकी देशों को रेसिप्रोकल टैरिफ से 90 दिन की राहत दी है। प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि अगर अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार शुल्क अगले तीन महीनों में लागू हो जाते हैं, तो भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025 में घटकर 6.1 प्रतिशत रह सकती है। इससे पहले इसका अनुमान 6.4 प्रतिशत लगाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है। ऐसे में 26 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने की स्थिति में भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा। खासतौर पर जेम्स एंड ज्वेलरी, मेडिकल इक्विपमेंट और अपैरल जैसे क्षेत्रों को अधिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2 अप्रैल को यह शुल्क लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन 9 अप्रैल को इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया। उन्होंने चीन को छोड़कर सभी देशों के लिए टैरिफ को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया।
भारत के लिए घरेलू मांग बनी रहेगी सहारा
मूडीज का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी मांग पर अपेक्षाकृत कम निर्भर है। इस कारण अमेरिका के शुल्क बढ़ोतरी का असर सीमित रहेगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और बजट में दी गई कर राहत घरेलू मांग को समर्थन दे सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "महंगाई दर में गिरावट के चलते हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक साल के अंत तक रेपो रेट को 5.75 प्रतिशत तक लाने के लिए और 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है।" 9 अप्रैल को आरबीआई ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दर में कटौती करते हुए इसे 6 प्रतिशत पर ला दिया है।
एशिया के अन्य देश होंगे अधिक प्रभावित
मूडीज ने कहा कि जिन एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से निर्यात पर निर्भर है, वे इस टैरिफ तनाव से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इनमें कंबोडिया, वियतनाम, थाईलैंड और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। इनकी सप्लाई चेन अमेरिका से जुड़ी है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में टैरिफ के कारण उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे वहां महंगाई में वृद्धि हो सकती है। वहीं एशिया में मुद्रास्फीति दबाव सीमित रहेगा, लेकिन वैश्विक मंदी की आशंका जरूर बनी हुई है।