Q1 Results: 14 तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा 115 कंपनियों का रेवेन्यू, लेकिन मार्जिन पर दबाव
Q1 Results: इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही और अब तक जिन 115 कंपनियों के नतीजे आए हैं, उनका कुल मिलाकर रेवेन्यू 14 तिमाहियों में सबसे तेज स्पीड से बढ़ा। हालांकि मार्जिन पर दबाव दिखा। जानिए मार्जिन पर दबाव और रेवेन्यू में उछाल की वजह तो सेक्टरवाइज कैसी स्थिति है और क्या रुझान है
जून तिमाही के लिए अब तक आईटी कंपनियों के नतीजे अधिकतर बाजार की उम्मीदों के हिसाब से रहे। कुछ कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर ही रिजल्ट पेश किया और किसी ने भी निराश नहीं किया। (File Photo- Pexels)
Q1 Results: जून तिमाही के कारोबारी नतीजे आने लगे हैं। BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस) और तेल-गैस के साथ-साथ जेएसडब्ल्यू स्टील को छोड़ अब तक जिन 115 कंपनियों ने कारोबारी नतीजे पेश किए हैं, कारोबरी मजबूती के चलते उनके रेवेन्यू में 14 तिमाहियों में सबसे तेज ग्रोथ रही। हालांकि मुनाफे में ग्रोथ बने रहने के बावजूद कच्चे माल और ऑपरेटिंग कॉस्ट में उछाल के चलते मार्जिन पर दबाव बढ़ा। जेएसडब्ल्यू को इस स्टडी से बाहर इसलिए रखा गया है क्योंकि मार्च तिमाही में इसके नतीजे पर वन-ऑफ यानी एकमुश्त असर था।
आंकड़े
स्टडी में शामिल 115 कंपनियों का कुल मिलाकर रेवेन्यू जून तिमाही में सालाना आधार पर 15.6% बढ़ा जोकि लगातार दूसरी तिमाही है जब यह ग्रोथ दोहरे अंक में है।
जून तिमाही में सालाना आधार पर कंपनियों का शुद्ध मुनाफा 10.86% की रफ्तार से बढ़ा लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 3.31% की गिरावट आई। मार्च 2026 तिमाही में यह 14.23% और जून 2025 तिमाही में 8.7% की रफ्तार से बढ़ा था।
ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो OPM (ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन) घटकर 21.08% रह गया जोकि 11 तिमाहियों में सबसे कम है। ACE इक्विटीज के आंकड़ों के मुताबिक इन कंपनियों का टोटल एक्सपेंडिचर जून तिमाही में सालाना आधार पर 15.8% बढ़ा जो 13 तिमाहियों में सबसे तेज बढ़ोतरी है और कच्चे माल की लागत 25.2% बढ़ी, जो 15 तिमाहियों में सबसे तेज उछाल है।
लागत बढ़ने के बावजूद क्यों बढ़ा रेवेन्यू
इंडिपेंडेंट रिसर्च एनालिस्ट दीपक जासानी का कहना है कि कच्चे माल, बिजली और एंप्लॉयीज पर होने वाला खर्च सालाना और तिमाही, दोनों आधार पर बढ़ा है। हालांकि अधिकतर कंपनियां इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने में सफल रहीं, जिससे बढ़ते खर्चों के बावजूद रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत बनी रही। दीपक का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में ऑपरेटिंग मार्जिन पर अभी भी दबाव है और साथ ही पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल और धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि कारोबारी माहौल कमजोर नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में मार्जिन को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
सेक्टरवाइज स्थिति
पहले आईटी सेक्टर की बात करें तो अब तक आईटी कंपनियों के नतीजे अधिकतर बाजार की उम्मीदों के हिसाब से रहे। कुछ कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर ही रिजल्ट पेश किया और किसी ने भी निराश नहीं किया। TCV (टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू) मजबूत बना रहा और अधिकतर कंपनियों ने एआई से जुड़ी सर्विसेज की अच्छी मांग की बात कही। हालांकि चुनौतियां भी बनी हुई हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले समय में एग्जीक्यूशन की स्पीड और डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग में सुधार पर खास नजर रहेगी। अब तक जिन कंपनियों के रिजल्ट आए हैं, उनमें टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), एलटीएममाइंडट्री (LTIMindtree), एलएंटटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज (L&T Technology Services) और एचलीएलटेक (HCLTech) बेहतर रिजल्ट पेश करने वाली कंपनियों में रह सकती हैं। एक्सिस सिक्योरिटीज के राजेश पालविया का कहना है कि निवेशकों का ध्यान इस बात पर है कि कंपनियों की एआई स्ट्रैटेजी से रेवेन्यू कितना बढ़ता है। उनका कहना है कि अब तक आईटी कंपनियों के नतीजों में कोई बड़ी निगेटिव बात सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले समय की विकास दर को लेकर चिंता बनी हुई है।
अब ऑटो एंसिलिरी कंपनियों की बात करें तो CEAT के नतीजे कमजोर रहे क्योंकि कच्चे माल की लागत में उछाल से मार्जिन पर असर दिखा। इससे संकेत मिल रहा है कि दूसरी टायर कंपनियों में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टील स्ट्राइप्स व्हील्स (Steel Strips Wheels) का रिजल्ट मजबूत बिक्री और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के दम पर शानदार रहा। जीएनए एक्सल्स (GNA Axles) और मेनन बेयरिंग्स ( Menon Bearings) के भी नतीजे अच्छे रहे। एसबीआईकैप्स सिक्योरिटीज के फंडामेंटल इक्विटी रिसर्च हेड सनी अग्रवाल का मानना है कि अधिकतर ऑटो एंसिलरी कंपनियां जून तिमाही के अच्छे नतीजे पेश करेंगी।
कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के लिए भी जून तिमाही बेहतर रही। ग्रो (Groww) का रिजल्ट कमोडिटी बिजनेस, मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग (MTF) और अन्य लेंडिंग प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग के कारण शानदार रहा। एंजेल वन (Angel One) का भी रिजल्ट सालाना आधार पर अच्छा रहा लेकिन आईपीएल से जुड़े एकमुश्त खर्च के कारण मुनाफे पर असर दिखा। डिस्काउंट ब्रोकर्स अब धीरे-धीरे डेरिवेटिव्स कारोबार पर निर्भरता कम कर वेल्थ मैनेजमेंट, एसेट मैनेजमेंट और मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग जैसे नए बिजनसेसेज की तरफ बढ़ रहे हैं।
कंजम्प्शन स्पेस में बजाज कंज्यूमर (Bajaj Consumer) और आईटीसी होटल्स (ITC Hotels) की ग्रोथ अच्छी रही लेकिन बजाज कंज्यूमर का कहना है कि जून तिमाही का हाई मार्जिन कच्चे माल की महंगाई के चलते बनाए रखना मुश्किल होगा। आईटीसी होटल्स के नतीजे तिमाही आधार पर कमजोर रहे, लेकिन यह सीजन के चलते रही। डीमार्ट की ग्रोथ मिड-टीन रही, लेकिन क्विक कॉमर्स कंपनियों से बढ़ते कॉम्पटीशन का असर भी दिखाई दिया। सनी अग्रवाल के मुताबिक डिस्क्रेशनरी कंजम्प्शन से जुड़ी कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ बेहतर हो सकती है, जबकि मैरिको जैसी कंज्यूमर स्टेपल्स कंपनियों की ग्रोथ मिड-टीन डिजिट्स में रह सकती है।
केबल सेगमेंट में भी जून तिमाही के रिजल्ट्स की शुरुआत अच्छी रही। इंडस्ट्री में अनुकूल परिस्थियों में पॉलीकैब के केबल और वायर बिजनेस की ग्रोथ मजबूत रही। हालांकि सनी अग्रवाल का कहना है कि कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतों में गिरावट से डीलरों की स्टॉकिंग रणनीति बदल सकती है और मांग कुछ समय के लिए टल सकती है।
बाकी सेक्टर्स की बात करें तो इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट इंडस्ट्री में मेटल्स की बढ़ती कीमतों के चलते मार्जिन पर दबाव रहा तो कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी और बड़े होटल बिजनेसेज में मार्जिन में सुधार हुआ। अब तक नतीजे पेश करने वाली एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन भी बेहतर रहे जबकि मेटल सेक्टर में ऑपरेटिंग मार्जिन में गिरावट आई।
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