सर्विस सेक्टर मई में और मजबूत, Iran-US War के बीच छह महीने में सबसे तेज रफ्तार, एक्सपोर्ट डिमांड में उछाल

Service Sector PMI in May: अमेरिका और ईरान की जंग (US-Iran War) ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है लेकिन भारत में पिछला महीना शानदार दिखा। सर्विस सेक्टर और मजबूत हुआ और एक्सपोर्ट डिमांड मजबूत हुई। चेक करें आंकड़े और जानिए कि इकॉनमी की सेहत कैसी है

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 2:25 PM
Service Sector PMI: पिछले महीने में में देश का सर्विस सेक्टर छह महीने में सबसे तेज रफ्तार से दौड़ा।

Service Sector PMI: पिछले महीने मई में देश का सर्विस सेक्टर छह महीने में सबसे तेज रफ्तार से दौड़ा। मजबूत मांग के चलते कारोबारी गतिविधियों और नए ऑर्डरों में तेजी आई, जबकि लागत में कमी से कीमतों में बढ़ोतरी को काबू करने में मदद मिली। इससे जुड़ा एक आंकड़ा सामने आया है। एसएंडपी ग्लोबल का एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल में 58.8 से बढ़कर मई में 59.8 हो गया यानी कि सर्विस सेक्टर में एक्टिविटी तेजी से बढ़ी है। नवंबर 2025 के बाद से सबसे मजबूत ग्रोथ है। बता दें कि इसके 50 से ऊपर होने का मतलब एक्टिविटी में विस्तार और 50 के नीचे होने का मतलब सिकुड़न है।

वहीं मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर को मिलाकर बनाए गए HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स में भी तेजी दिखी और यह अप्रैल के 58.2 से बढ़कर मई में 59.3 हो गया। इससे प्राइवेट सेक्टर में आर्थिक गतिविधियां के और मजबूत होने का सकते मिल रहा है।

आंकड़ों से क्या-क्या बातें आई सामने


पिछले महीने मई में सर्विस सेक्टर का पीएमआई अप्रैल में 58.8 की तुलना में मई में 59.8 पर पहुंच गया। इससे माल ढुलाई, डिजिटल सॉल्यूशंस, ई-कॉमर्स, एंटरटेनमेंट और आईटी जैसी सर्विसेज की मांग से नए कारोबार में ग्रोथ को बढ़ावा मिला। नए ऑर्डर्स भी छह महीनों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़े, जबकि कंपनियों ने भर्ती जारी रखी, हालांकि यह मामूली थी। इसके अलावा आंकड़ों से यह भी सामने आया कि अप्रैल में कमजोर पड़ने के बाद मई में निर्यात की मांग में सुधार हुआ। कंपनियों को

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, यूएई और यूके के बाजारों से नए बिजनेस मिले।

बिजनेस आउटलुक इंडेक्स 62.3 से गिरकर 61.9 पर आ गया और यह लगातार दूसरा महीना रहा, जब इसने गिरावट आई। यह अपने हिस्टोरिकल एवरेज से नीचे रहा जिससे कंपनियों के अधिक सतर्क रुझान का संकेत मिल रहा है। मई में लागत का दबाव भी ऊंचा बना रहा, लेकिन चार महीने के निचले स्तर पर आ गया, जिससे सेलिंग प्राइस में बढ़ोतरी की रफ्तार को कम करने में मदद मिली और यह जनवरी के बाद से सबसे कम हो गई। कंपनियों का फूड, फ्यूल, गैस, लेबर और मैटीरियल्स पर खर्च अधिक बना रहा।

क्या कहना है इकनॉमिस्ट का

एचएसबीसी के चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी का कहना है कि देश के सर्विस सेक्टर के पीएमआई ने मई में कारोबारी गतिविधि में विस्तार का संकेत दिया, जिसे नए कारोबार में लगातार ग्रोथ का सपोर्ट मिला। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सर्विसेज की मांग विदेशों में तेजी से बढ़ी और अप्रैल में आई बड़ी गिरावट के बाद इसमें अच्छी वापसी देखने को मिली तो साथ ही कंपनियों की लागत यानी इनपुट कॉस्ट बढ़ने की रफ्तार कम हुई, जिससे ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ाने का दबाव भी घट गया।

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