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इंडियन कंसल्टिंग फर्मों ने इस रूल को हटाने की मांग की, जिससे सिर्फ PWC, EY और KPMG को फायदा होता है

अभी पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए एक ऐसा नियम है, जिसके चलते बिग 4 को काफी फायदा होता है। यह नियम कहता है कि पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए किसी कंसल्टिंग का टर्नओवर 500 करोड़ और एंप्लॉयीज की संख्या 500 होनी चाहिए

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jun 11, 2025 पर 5:45 PM
इंडियन कंसल्टिंग फर्मों ने इस रूल को हटाने की मांग की, जिससे सिर्फ PWC, EY और KPMG को फायदा होता है
NICSI मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के तहत आती है। यह सरकारी कंपनियों में बोली लगाने के लिए जरूरी नियम एवं शर्तें तय करती है।

इंडियन कंसल्टिंग फर्मों ने सरकार से पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के नियमों में बदलाव करने की गुजारिश की है। इन कंपनियों का मानना है कि इन नियमों की वजह से दुनियाभर में बिग 4 नाम से मशहूर विदेशी कंसल्टिंग कंपनियों को काफी फायदा मिलता है। बिग-4 का मतलब डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी, ईवाय और केपीएमजी से है। मनीकंट्रोल ने इससे पहले खबर दी थी कि सरकार बिग 4 की जगह इंडियन कंसल्टिंग कंपनियों को बढ़ावा देना चाहती है। सरकार का प्लान देश में बिग 4 के टक्कर की कंसल्टिंग कंपनियां बनाने का है।

अभी PSU के इम्पैनलमेंट के लिए यह है नियम

अभी पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए एक ऐसा नियम है, जिसके चलते बिग 4 को काफी फायदा होता है। यह नियम कहता है कि पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए किसी कंसल्टिंग का टर्नओवर 500 करोड़ और एंप्लॉयीज की संख्या 500 होनी चाहिए। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज (NICSI) जैसी इम्पैनलिंग एजेंसियों ने यह नियम बनाया है। इंडियन कंसल्टिंग कंपनियों का कहना है कि इस नियम की वजह इंडियन कंपनियां सरकारी कंपनियों (PSU) के एडवायजरी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली नहीं लगा पाती हैं।

NICSI पीएसयू इम्पैनलमेंट के नियम तय करती है

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