जुलाई में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) 3.5% बढ़ा, जबकि जून में यह ग्रोथ केवल 1.5% रही थी। सरकार ने 28 अगस्त को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। यह बढ़ोतरी आठ कोर इंडस्ट्रीज के प्रदर्शन के उलट रही, जिनका IIP में 40% वेटेज है। जुलाई में कोर सेक्टर की वृद्धि घटकर 2% रही, जबकि जून में यह 2.2% थी। इनमें से चार इंडस्ट्री में गिरावट देखने को मिली।
स्टील और सीमेंट इंडस्ट्रीज ने मजबूत प्रदर्शन किया। स्टील उत्पादन 12.8% बढ़ा, जो पिछले 21 महीनों की सबसे तेज वृद्धि है, जबकि सीमेंट उत्पादन 11.7% बढ़ा, जो चार महीने का उच्च स्तर है। बिजली उत्पादन भी 0.5% की मामूली बढ़त के साथ फिर से ग्रोथ में आया।
हालांकि, व्यापक सूचकांक अब भी दबाव में है। एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है। इससे मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन में यह सुधार आर्थिक गतिविधियों की स्थिरता को दिखाता है। हालांकि, वैश्विक मांग और घरेलू खपत की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
IIP growth में कोर सेक्टर क्या है?
कोर सेक्टर दरअसल देश की अर्थव्यवस्था की नींव जैसे हैं। इसमें आठ बड़े उद्योग आते हैं- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली। इनका असर सीधे बाकी उद्योगों, फैक्ट्रियों और रोजगार पर पड़ता है। यही वजह है कि इनकी रफ्तार से पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत चल रही है।