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Info Edge ने अपनी ही सब्सिडियरी 4B Networks के फाउंडर राहुल यादव पर की FIR, किस वजह से लिया एक्शन

4B Networks, इन्फो एज की एक इनडायरेक्ट सब्सडियरी है। इन्फो एज ने 2021 की शुरुआत से कई राउंड में ऑलचेकडील्स इंडिया के जरिए 4B Networks में कुल 288 करोड़ रुपये का निवेश किया और लगभग 59 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी। इन्फो एज को 4B Networks में अपने निवेश को बट्टे खाते में डालने से कुल 532 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 02, 2024 पर 9:28 AM
Info Edge ने अपनी ही सब्सिडियरी 4B Networks के फाउंडर राहुल यादव पर की FIR, किस वजह से लिया एक्शन
4बी नेटवर्क्स को नवंबर 2020 में हाउसिंग डॉट कॉम के फाउंडर राहुल यादव ने शुरू किया था।

कंज्यूमर इंटरनेट ग्रुप इन्फो एज (Info Edge) ने अपनी पोर्टफोलियो कंपनी 4बी नेटवर्क्स के फाउंडर राहुल यादव और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। इन पर फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी ऑलचेकडील्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIPL) की ओर से दर्ज की गई शिकायत पर, 4बी नेटवर्क्स से जुड़े राहुल यादव, देवेश सिंह, प्रतीक चौधरी, संजय सैनी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ 29 नवंबर, 2024 को मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन ने एक FIR दर्ज की। इन लोगों पर 4बी नेटवर्क्स के फंड से जुड़ी कुछ धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

इन्फो एज, रिक्रूटमेंट, मैट्रिमोनी, रियल एस्टेट, एजुकेशन और रिलेटेड सर्विसेज के मामले में देश की दिग्गज ऑनलाइन क्लासिफाइड्स कंपनी है। 4बी नेटवर्क्स को नवंबर 2020 में हाउसिंग डॉट कॉम के फाउंडर राहुल यादव ने शुरू किया था। इसे रियल एस्टेट डेवलपर्स और ब्रोकर्स को एक-दूसरे के साथ कम्युनिकेट करने और इसके प्लेटफॉर्म के जरिए अपना कारोबार संचालित करने में सक्षम बनाने के लिए बनाया गया था।

इन्फो एज का 4B Networks में कितना निवेश

इन्फो एज ने 2021 की शुरुआत से कई राउंड में ऑलचेकडील्स इंडिया के जरिए 4बी नेटवर्क्स में कुल 288 करोड़ रुपये का निवेश किया और लगभग 59 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी। पिछले साल इन्फो एज ने उस वक्त एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू किया, जब 4बी नेटवर्क्स अपने ऑपरेशंस, मैनेजमेंट, वित्तीय लेनदेन की डिटेल्स और रिलेटेड पार्टीज के साथ लेनदेन के बारे में जानकारी इन्फो एज को देने में विफल रही। इसके बाद इन्फो एज ने पिछले साल जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दोनों कंपनियों ने अदालत के आदेश के मुताबिक मध्यस्थता यानि आर्बिट्रेशन का रास्ता अपनाया।

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