चंदा कोचर की गिरफ्तारी बस शुरुआत, अभी कई बड़े नाम आ सकते हैं सामने: शिकायतकर्ता अरविंद गुप्ता

अरविंद गुप्ता ही व्यक्ति थे, जिन्होंने साल 2016 में पहली बार ICICI बैंक-वीडियोकॉन लोन मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर RBI तक को लेटर लिखे थे। सीबीआई ने इस मामले में अब जांच करते हुए चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत को गिरफ्तार कर लिया। अरविंद गुप्ता का कहना है कि अभी यह बस शुरुआत है और इस मामले में कई बड़े खुलासे होने बाकी हैं

अपडेटेड Dec 28, 2022 पर 12:35 PM
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डॉ अरविंद गुप्ता, ICICI बैंक-वीडियोकॉन लोन मामले के व्हिसलब्लोअर

केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) 24 दिसंबर को वीडियोकॉन ग्रुप (Videocon Group) को लोन से जुड़े 3,250 करोड़ रुपये के संदिग्ध घोटाले में ICICI बैंक की पूर्व सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर (Chanda Kochhar) और उनके पति दीपक कोचर (Deepak Kochhar) को गिरफ्तार किया। दिन बाद एजेंसी ने वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत (Venugopal Dhoot) को भी गिरफ्तार कर लिया, जिन्होंने कथित तौर पर कोचर परिवार के साथ इस ट्रांजैक्शन को लेकर सौदा किया था। CBI के अनुसार, ICICI बैंक से लिए गए लोन के बदले में उन्होंने दीपक कोचर की रिन्यूएबल पावर कंपनी में निवेश किया।

इस मामले को सबसे पहले साल 2016 में व्हिसलब्लोअर अरविंद गुप्ता ने सामने लाया था। 27 दिसंबर को मनीकंट्रोल को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अरविंद गुप्ता ने कहा कि ये गिरफ्तारियां जांच के सिर्फ शुरुआती चरण का हिस्सा है और अभी इस मामले में कई बड़े खुलासे होते दिख सकते हैं।

गुप्ता ने कहा कि घोटाले में वास्तविक लाभार्थियों की भूमिका और वीडियोकॉन को लोन मंजूर करने में शामिल लोगों की जांच को एक मल्टी-एजेंसी ग्रुप की तरफ से की जानी चाहिए। इसके अलावा, गुप्ता ने धूत और चंदा कोचर के पति की कंपनी न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स के बारे में भी सवाल उठाए। पेश हैं इंटरव्यू संपादित अंश:


आखिरकार CBI ने कोचर और वेणुगोपाल धूत को उस मामले में गिरफ्तार कर लिया है, जिसे आपने सबसे पहले उठाया था...

इस जांच में कई चीजें गायब हैं। अभी यह बस शुरुआत है। जांच ने अभी तक चंदा कोचर के उन अधिकारियों की मंडली की पहचान नहीं की है, जो इस सबमें शामिल थे। अभी जो हुआ है वह केवल शुरुआती और प्रारंभिक हिरासत है।

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क्या आप इसे थोड़ा विस्तार से बता सकते हैं?

मुझे लगता है कि CBI अभी भी जांच की एक सीमित सीमा तक ही आगे बढ़ पाई है। असली मुद्दा ICICI बैंक के सीनियर मैनेजमेंट टीम का है। उनकी भूमिका की विस्तार से जांच नहीं की गई है।

ICICI बैंक के बोर्ड ने चंदा कोचर का बचाव करते हुए कहा था कि कुछ भी गलत नहीं हुआ है और वीडियोकॉन को लोन असल में क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट ग्रुप और क्रेडिट कमिटी ने मंजूर किया था। उन्होंने शुरू में कहा कि कुछ भी गलत नहीं है (कोचर की संलिप्तता के साथ) और सब ठीक है। ICICI का बोर्ड अपने शासन में पारदर्शी हैं। बाद में उन्हें मामले की हकीकत का पता चला।

कोचर क्रेडिट कमेटी में अकेली शख्स नहीं थीं...

हां। वह कहती रही है कि वह अकेली शख्स नहीं है। ध्यान रहे, यह बहुत महत्वपूर्ण है। सीबीआई की FIR में उन्होंने सीनियर मैनेजमेंट अधिकारियों का नाम लिया है। यहां तक ​​कि सीबीआई ने भी कहा है कि अप्रूवल कमिटी के इन सीनियर अधिकारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। ऐसा होना अभी बाकी है।

इस समय आपके सामने क्या सवाल हैं?

वे (सीबीआई) ज्यादा से ज्यादा वीडियोकॉन तक पहुंचे हैं। सवाल यह है कि ICICI बैंक की फंडिंग के सभी लाभार्थी कौन हैं? वे कहां हैं? यहां न्यूपॉवर (Nupower) काफी अहम हो जाता है। इसे दीपक कोचर और धूत के साथ मिलकर बनाया गया था। एक बड़ी कॉरपोरेट कंपनी एक बैंकर के पति के साथ ज्वाइंट वेंचर क्यों बनाएगी? फिर पूरी ज्वाइंट वेंचर की हिस्सेदारी चंदा कोचर के पति को सौंप दी गई।

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क्या आपको लगता है कि NuPower Renewables एक 'मुखौटा कंपनी' थी?

न्यूपॉवर एक SPV (स्पेशल परपज व्हीकल) थी जिसे भारत में राउंड-ट्रिप फंड के लिए बनाया गया था और इस प्रक्रिया में, दीपक कोचर को उद्योगपति बनाया गया। दीपक कोचर न केवल बड़े कॉरपोरेशन के साथ मेल मिलाप कर रहे थे, बल्कि बैंकरों के साथ भी सांठगांठ कर रहे थे। उन्होंने लाभार्थियों से सांठगांठ की। मेरा मानना है कि न्यूपॉवर, राउंड ट्रिप मनी के लिए एक SPV था।

धूत ने अप्रूवर (सरकारी गवाह) बनने की हामी भर दी है।

यह कई बड़े राज खोल सकता है। यह सिर्फ शुरुआत है। इसे पूरे कॉरपोरेट-बैंकिंग गठजोड़ को सामने लाने में 5 या 10 साल लग सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि बैंकिंग इंडस्ट्री में इस मामले के बड़े मायने हैं?

मैं कॉरपोरेट गवर्नेंस में खामियों के मामलों से लड़ रहा हूं, जैसे हाल ही में अक्ष ऑप्टिफाइबर (Aksh Optifiber) से जुड़े मामले में देखा गया। इस मामले में अभी तक कोई जांच नहीं हुई है जो मेरे लिए एक बड़ी निराशा है। पिछले पांच सालों में करीब 10 से 11 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन को बट्टे खाते में डाल दिया गया है।

यह अर्थव्यवस्था की सेहत पर असर डालता है। आप इसके जरिए सांठगांठ करने वालों को प्रमोटरों को फलने-फूलने दे रहे हैं, जो फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए जनता का पैसा लूट रहे हैं। यह सिर्फ एक केस है। पूरा मामला काफी पेचीदा है। जब तक प्रमोटर से सत्ता की कृपा नहीं हटती है, तब तक कुछ नहीं होगा।

क्या ICICI बैंक-वीडियोकॉन मामले में न्यायिक स्तर की जांच होनी चाहिए?

मुझे नहीं लगता कि न्यायिक जांच से मदद मिलेगी। जांच एजेंसियों को आपस में तालमेल बनाकर मामले की तह तक जाना चाहिए। किसी एक एजेंसी को इस मामले की अलग-अलग जांच करने का अधिकार नहीं है।

जब आपने पहली बार इस मुद्दे को उठाया था तो नियामकों की प्रतिक्रिया कैसी थी?

शुरु में प्रतिक्रिया में काफी ठंडी और निराशाजनक थी। हर ऑफिस में शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। आप सेबी (SEBI) का ही उदाहरण ले लीजिए, जिसे निवेशकों के हितों का ध्यान रखना है। यह बहुत मशीनी तरीके से काम करता है और इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। निवेशकों की चिंताओं को दूर करने का हमारा सिस्टम अभी भी बहुत खराब है।

आपने ICICI बैंक मामले में एक शेयरधारक के रूप में काम किया या एक एक्टिविस्ट के तौर पर?

मैं पहले एक शेयरधारक हूं। देश में हजारों लिस्टेड कंपनियां हैं और उन सभी के पास कहने के लिए कुछ न कुछ है। एक एक्टिविस्ट के रूप में आप कितने मामले उठा सकते हैं? आपके पास रिसर्च करने और इन सभी मामलों पर लगकर कार्रवाई पर नजर रखने का समय नहीं है। जब तक आप असल में किसी चीज से दुखी या प्रभावित नहीं होते हैं, तब तक आप लड़ाई को आगे नहीं ले जा पाते हैं।

आपने कई कंपनियों में निवेश किया है, लेकिन सिर्फ ICICI बैंक के मामले को ही प्रमुखता से उठाया। क्यों?

ICICI बैंक कोई साधारण सूचीबद्ध कंपनी नहीं है। वे कॉरपोरेट प्रशासन और देश के कॉरपोरेट इतिहास के प्रतीक हैं। अगर ICICI बैंक जैसा दिग्गज कॉर्पोरेट इस तरह के बैड-गवर्नेंस में शामिल हो सकता है, तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि बाकी हजारों दूसरी लिस्टेड कंपनियों में क्या हो सकता है। इस मामले को उठाना बहुत जरूरी था।

इसका शिकार अक्सर छोटे निवेशक होते हैं। क्यों?

वे कंपनी के नैरेटिव पर भरोसा करने के बाद हमेशा प्रीमियम पर निवेश करते हैं और अंत में पैसा खो देते हैं। शेयरधारक ही कैपिटल मार्केट की रीढ़ है और इन्हें ही सबसे अधिक धोखा दिया जाता है और लूटा जाता है। मैं शेयरधारकों के लिए सुरक्षा कवच बनाने की मांग करता रहा हूं।

छोटे निवेशकों के लिए आपका क्या संदेश है?

हिम्मत मत हारो। उठो, अपनी आवाज उठाओ और तब तक लड़ो जब तक तुम अपने मिशन को पूरा नहीं कर लेते। किसी दिन, कहीं न कहीं, कोई आपकी शिकायत पर कार्रवाई करेगा। इस देश की सबसे बड़ी समस्या यह है कि मीडिया ने अपनी अंतरात्मा से समझौता कर लिया गया है। जिस दिन सही लोग सामने आएंगे, उस दिन देश का कॉरपोरेट कल्चर बदलेगा।

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