Microsoft लाई अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का पैकेज; US, UK, भारत और कनाडा में 60000 कर्मचारियों को कर रही ऑफर

Microsoft कर्मचारियों को दिसंबर की शुरुआत तक यह तय करना होगा कि वे इस वॉलंटरी बायआउट ऑफर को स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं। इससे पहले इस साल अप्रैल में माइक्रोसॉफ्ट ने पहली बार एक 'वॉलंटरी रिटायरमेंट प्रोग्राम' की घोषणा की थी

अपडेटेड Oct 27, 2026 पर 8:30 AM
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Microsoft के जो कर्मचारी वॉलंटरी बायआउट में शामिल होंगे, वे 31 दिसंबर को कंपनी छोड़ देंगे।

माइक्रोसॉफ्ट अपने कई कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट यानि कि अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही है। कंपनी एक तरफ आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर भारी खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ वह पूंजी के कुशल इस्तेमाल पर ध्यान दे रही है। CNBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका, कनाडा, भारत और यूनाइटेड किंगडम में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के लिए एक नया 'वॉलंटरी एग्जिट ऑफर' पेश किया है। यह उन कर्मचारियों के लिए है जिनका 'एक्सपीरियंस लेवल' 70 या उससे कम है।

CNBC को मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति से पता चला है कि लगभग 60,000 कर्मचारी इसके लिए पात्र हैं। यह संख्या माइक्रोसॉफ्ट के कुल 223,000 कर्मचारियों का लगभग 27% है। कर्मचारियों को दिसंबर की शुरुआत तक यह तय करना होगा कि वे इस वॉलंटरी बायआउट ऑफर को स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं। जो कर्मचारी इसमें शामिल होंगे, वे 31 दिसंबर को कंपनी छोड़ देंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मार्केटिंग, सेल्स और इंजीनियरिंग टीमों ने इस नए बायआउट पैकेज में शामिल न होने का फैसला किया है।

इससे पहले इस साल अप्रैल में माइक्रोसॉफ्ट ने पहली बार एक 'वॉलंटरी रिटायरमेंट प्रोग्राम' की घोषणा की थी, जिसके लिए अमेरिका के लगभग 7% कर्मचारी पात्र थे। इसके बाद जुलाई में माइक्रोसॉफ्ट ने 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना की घोषणा की।


बिजनेस मॉडल में बदलाव, डेटा सेंटरों पर ज्यादा खर्च

माइक्रोसॉफ्ट AI कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटरों पर अपना खर्च बढ़ा रही है। कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic), ओपनएआई (OpenAI) और कई अन्य कंपनियों को क्लाउड सेवाएं दे रही है। इस साल जुलाई में माइक्रोसॉफ्ट ने बताया था कि सितंबर तिमाही के लिए उसका पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। इस वजह से माइक्रोसॉफ्ट की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ा है।

माइक्रोसॉफ्ट अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनी अब क्लाइंट्स से इस आधार पर शुल्क लेने की कोशिश कर रही है कि वे वास्तव में कितनी AI तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी ने अपने प्रोग्रामर्स, सेल्स स्टाफ और सप्लाई चेन से जुड़े कर्मचारियों को AI टूल्स दिए हैं, जिसके अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। साथ ही कंपनी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके पास सही टैलेंट मौजूद हो, ताकि वह ग्रोथ के नए और बेहतरीन अवसरों का फायदा उठा सके।

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