ऑनलाइन गेमिंग पर रोक का असर Cashfree, PhonePe जैसे पेमेंट एग्रीगेटर के रेवेन्यू पर भी पड़ेगा

गेमिंग के लिए यूपीआई के जरिए हर महीने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस होते थे। एनपसीआई के डेटा के मुताबिक, ट्रांजेक्शंस की सालाना वैल्यू 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाती थी। यूपीआई प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग के मंथली ट्रांजेक्शन करीब 40 करोड़ थे

अपडेटेड Aug 26, 2025 पर 9:38 PM
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पीए फर्मों के लिए यूपीआई पेमेंट्स से पैसे कमाने के लिहाज से गेमिंग इंडस्ट्री बड़ा जरिया बन गई थी।

ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) पर रोक से पेमेंट एग्रीगेटर (पीए) कंपनियों को तगड़ी चोट लगेगी। एक अनुमान के मुताबिक, कैशफ्री, फोनपे और ईजीबज जैसी पीए कंपनियों के रेवेन्यू में इस फाइनेंशियल ईयर में 25-30 फीसदी गिरावट आ सकती है। रेजरपे के रेवेन्यू में भी बड़ी गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि, पीए के मुकाबले उसके रेवेन्यू में कम गिरावट आएगी। यह 10 फीसदी तक रह सकती है।

आरएमजी फर्मों के लिए पेमेंट के अलग तरीके का इस्तेमाल होता था

रियल मनी गेमिंग (RMG) कंपनियों के लिए पेमेंट के अलग तरीके का इस्तेमाल होता था। इसके लिए पेमेंट फर्मों को आरएमजी की जरूरत के हिसाब से अलग प्रोडक्ट्स तैयार करने होते थे। यूजर्स के जीतने पर पैसा उनके अकाउंट में जल्द क्रेडिट होना जरूरी होता था। ज्यादातर आरएमजी के मामले में वॉलेट की लोडिंग को पे-इन कहा जाता था, जबकि विनिंग अमाउंट के विड्रॉल को पे-आउट कहा जाता था।


हर महीने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस 

गेमिंग के लिए यूपीआई के जरिए हर महीने 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस होते थे। एनपसीआई के डेटा के मुताबिक, ट्रांजेक्शंस की सालाना वैल्यू 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाती थी। यूपीआई प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग का मंथली ट्रांजेक्शन करीब 40 करोड़ थे। इसका मतलब है कि हर महीने 19 अरब से ज्यादा कुल प्रोसेसेज होते थे। इसका मतलब है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान पेमेंट कंपनियों का रेवेन्यू 1,500 करोड़ रुपये रहा होगा। यह सिर्फ एक अनुमान है।

पीए कंपनियां रेवेन्यू के असर के बारे में बताना नहीं चाहतीं

फोनपे ने इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए। रेजरपे ने भी कुछ बताने से इनकार कर दिया। Easebuzz और Cashfree ने इस बात से इनकार किया कि ऑनलाइन गेमिंग पर रोक का असर उनके रेवेन्यू पर पड़ेगा। कैशफ्री ने एक बयान में कहा, "हमारा मर्चेंट पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड है। हमारा ज्यादा वॉल्यूम ईकॉमर्स, बीएफएसआई, ट्रैवल और टूरिज्म जैसे सेक्टर से आता है। हमारे कुल बिजनेस में रियल मनी कंपनियों की हिस्सेदारी काफी कम है। इसलिए हमें नहीं लगता कि सरकार के ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाने का असर हमारे रेवेन्यू या पेमेंट वॉल्यूम पर पड़ेगा। हम इस फाइनेंशियल ईयर के ग्रोथ टारगेट को हासिल करने की तरफ बढ़ रहे हैं।"

कैशफ्री का पे-आउट एपीआई 2018 में लॉन्च हुआ था

पहले पे-आउट्स चैनल का इस्तेमाल रिफंड्स और कैशबैक की प्रोसेसिंग के लिए होता था। कैशफ्री का पे-आउट एपीआई (अप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) 2018 में लॉन्च हुआ था। यह एक इनोवेशन था, जिससे कैशफ्री आरएमजी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा पीए कंपनियों में से एक हो गई। एपीआई एक दूसरे से कम्युनिकेट करने के लिए दो तरह के सॉफ्टेवयर को कनेक्ट करने में मदद करता है। प्लेयर्स के जीतने पर पैसा पेआउट एपीआई के इस्तेमाल से क्रेडिट होता था।

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पीए फर्मों के लिए गेमिंग इंडस्ट्री कमाई का बड़ा जरिया बन गई थीं

पीए फर्मों के लिए यूपीआई पेमेंट्स से पैसे कमाने के लिहाज से गेमिंग इंडस्ट्री बड़ा जरिया बन गई थी। सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर रोक के लिए जो कानून बनाया है। उसमें यह प्रावधान है कि बैंक या कोई दूसरा फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन यूपीआई के लिए पेमेंट या मर्चेंट डिस्काउंट रेट के लिए किसी तरह का कमीशन चार्ज नहीं कर सकता है। हालांकि, बैंक और पीए ऑनलाइन मर्चेंट से प्लेटफॉर्म फीस चार्ज करते हैं।

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