ओयो होटल्स (Oyo Hotels) का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के जरिए पैसा जुटाने की योजना अटक गई है। ऐसे में कंपनी अब 66 करोड़ डॉलर (करीब 5,500 करोड़ रुपये) के लोन को रिफाइनेंस कराने के लिए अपोलो ग्लोबल मैनैजमेंट इंक (Apollo Global Management Inc) के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी को उम्मीद है इससे उसे कर्ज को घटाने के लिए और समय मिल जाएगा। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने गुरुवार 5 अक्टूबर को सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, ओयो होटल्स की प्राइवेट कंपनी 'ऑरवेल स्टेज प्राइवेट (Oravel Stays Pvt)' कर्ज की मैच्योरिटी अवधि को 5 साल बढ़ाने के लिए बातचीत कर रही है। अभी कर्ज की मैच्योरिटी अवधि 2026 में पूरा हो रहा है। वहीं एक दूसरे सूत्र ने बताया कि महीने की शुरुआत में इस बारे में कोई फैसला हो सकता है।
सॉफ्टबैंक के निवेश वाली ओयो होटल्स यह बातचीत ऐसे समय में कर रही है, जब हाल ही में उसने पहली बार किसी वित्त वर्ष में मुनाफा दर्ज किया है। वहीं फिच रेटिंग्स ने ट्रेवल की मांग बढ़ने के बीच उसकी अर्निंग बेहतर होने की उम्मीद जताई है। बता दें कि ओयो विदेशी संस्थाओं से फंडिंग लेने वाली पहली भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप थी और उस वक्त उसने फंडिंग के बदले काफी उदार शर्तें रखी थीं।
ओयो के एक प्रवक्ता ने बताया, "मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ, हमें नियमित रूप से सस्ते फंडिंग विकल्प वाले स्रोतों की ओर से संपर्क किया जाता है। हालांकि कंपनी के बोर्ड ने अभी तक कोई भी मंजूरी नहीं दी है और इसमें एक हिस्से का समय से भुगतान भी शामिल है।" वहीं अपोलो के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार दिया।
ओयो के IPO का इंतजार काफी लंबा होता जा रहा है। IPO से जुटाई गई रकम से कंपनी को अपने कर्ज के एक हिस्से को चुकाने में मदद मिल सकती थी और उसे रिफाइनेंस की जरूरत भी नहीं पड़ती है। कंपनी ने IPO के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर भी जमा कराए थे, लेकिन उसके बाद से इस पर कोई अपडेट नहीं है।