पर्सनल लोन लें या ओवरड्राफ्ट? जानें कौन सा ऑप्शन रहेगा ज्यादा फायदेमंद

पर्सनल लोन और ओवरड्राफ्ट दोनों ही एक्स्ट्रा फंड उपलब्ध कराते हैं, लेकिन इनका काम करने का तरीका अलग-अलग होता है. जहां पर्सनल लोन में अमाउंट एक ही बार में दिया जाता है और रिपेमेंट भी फिक्स होता है, वहीं ओवरड्राफ्ट में आप तय लिमिट तक फ्लेक्सिबल तरीके से फंड ले सकते हैं. ओवरड्राफ्ट में ब्याज सिर्फ इस्तेमाल किए गए अमाउंट पर लगता है.

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 3:20 PM
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भारत का डिजिटल लेंडिंग सिस्टम तेजी से डेवलप हो रहा है. बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) अब कई तरह के क्रेडिट ऑप्शन ऑफर कर रही हैं. अब कुछ ही क्लिक में पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना बेहद आसान हो गया है.

ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंक और NBFCs जो क्रेडिट सुविधाएं देते हैं, उनमें पर्सनल लोन और ओवरड्राफ्ट सबसे आम ऑप्शन (क्रेडिट कार्ड के अलावा) बनकर उभरे हैं. अगर आपको फंड की जरुरत है, तो ये दोनों ऑप्शंस मददगार हो सकते हैं. हालांकि, इन दोनों का ही मकसद एप्लिकेंट को फंड मुहैया कराना होता है, लेकिन इनका प्रोसेस या काम करने का तरीका अलग-अलग होता है.

ओवरड्राफ्ट या पर्सनल लोन?

बैंकों और NBFCs की ढेरों क्रेडिट सुविधाओं के बीच यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि पर्सनल लोन लेना सही रहेगा या ओवरड्राफ्ट. इस बीच सही ऑप्शन चुनना आपकी फाइनेंशियल जरूरतों, रिपेमेंट क्षमता और ब्याज दरों पर निर्भर करता है.


दोनों ही मामलों में अप्रूवल प्रोसेस, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और पीरियड अलग-अलग बैंकों के हिसाब से अलग हो सकते हैं. यहां हम पर्सनल लोन और ओवरड्राफ्ट की पूरी जानकारी दे रहे हैं, जो आपको सही ऑप्शन चुनने में मदद करेगी.

अगर आप भी लोन लेने की सोच रहे हैं, तो मनीकंट्रोल के जरिए आप 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन 100% डिजिटल प्रोसेस के साथ ले सकते हैं. इन पर ब्याज दरें सिर्फ 10.5% सालाना से शुरू होती हैं.

ओवरड्राफ्ट क्या है?

ओवरड्राफ्ट एक ऐसी क्रेडिट सुविधा है, जो आपके बैंक अकाउंट से लिंक होती है. इसमें आप अपने अकाउंट में मौजूद बैलेंस से ज्यादा पैसे (एक तय लिमिट तक) निकाल सकते हैं.

इसमें आपको सिर्फ उसी अमाउंट पर ब्याज देना होता है, जितना आपने इस्तेमाल किया है. इसका रिपेमेंट फ्लेक्सिबल होता है, लेकिन लिमिट से ज्यादा पैसा निकालने पर एक्स्ट्रा चार्ज लग सकता है. यह सुविधा इमरजेंसी या कैश की अस्थायी कमी के दौरान फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन समय पर रिपेमेंट न करने पर यह महंगी साबित हो सकती है.

उदाहरण: अगर आपके अकाउंट में 1,000 रुपए हैं और आपको 2,000 रुपए की जरूरत है, तो ओवरड्राफ्ट के जरिए आप अतिरिक्त 1,000 रुपए निकाल सकते हैं और बाद में ब्याज सहित चुका सकते हैं.

ओवरड्राफ्ट कैसे काम करता है

  • बैंक आपके ओवरड्राफ्ट की एक फिक्स लिमिट तय करता है

  • आप जितना अमाउंट इस्तेमाल करते हैं, सिर्फ उसी पर ब्याज लगता है, न कि कुल ओवरड्राफ्ट लिमिट पर 

  • इसका रिपेमेंट फ्लेक्सिबल होता है

  • लिमिट से ज्यादा इस्तेमाल करने पर एक्स्ट्रा फीस लग सकती है

  • ज्यादातर बैंक इसे सेविंग्स अकाउंट से लिंक करते हैं और लिमिट एवरेज मंथली ट्रांजेक्शन के आधार पर तय होती है

ओवरड्राफ्ट के फायदे

  • जरूरत पड़ने पर इंस्टेंट कैश मिलता है

  • कोई फिक्स रीपेमेंट शेड्यूल नहीं, यानी फ्लेक्सिबल पेमेंट

  • सिर्फ इस्तेमाल किए गए अमाउंट पर ब्याज लगता है 

  • शॉर्ट-टर्म इमरजेंसी यानि अचानक आए खर्चों के लिए बेहतर विकल्प

ओवरड्राफ्ट के नुकसान

  • पर्सनल लोन की तुलना में ऊंची ब्याज दरें 

  • लिमिट से ज्यादा खर्च करने पर एक्स्ट्रा फीस 

  • बड़े अमाउंट के लिए उपयुक्त नहीं

  • बार-बार इस्तेमाल करने की आदत पड़ सकती है, जिससे कर्ज बढ़ सकता है

पर्सनल लोन क्या है?

पर्सनल लोन एक फिक्स अमाउंट का लोन होता है, जो बैंक या लेंडर आपको एक ही बार में देते हैं. इसे तय पीरियड में मंथली EMIs के जरिए ब्याज सहित चुकाना होता है. इसकी ब्याज दरें ओवरड्राफ्ट की तुलना में सस्ती होती हैं, लेकिन रिपेमेंट शेड्यूल फिक्स होता है. पर्सनल लोन बड़े अमाउंट के लिए उपयुक्त होता है. इससे घर का रेनोवेशन, शादी या पुराने कर्ज चुकाने जैसे काम किए जा सकते हैं.

पर्सनल लोन कैसे काम करता है

  • आप लेंडर से एक फिक्स अमाउंट लेने के लिए अप्लाई करते हैं

  • लेंडर आपके अकाउंट में एक ही बार में पैसे ट्रांसफर करता है

  • तय समय (आमतौर पर कुछ महीनों से लेकर 5 साल तक) के अंदर नियमित मंथली EMIs में रिपेमेंट करना होता है 

  • कुल लोन अमाउंट पर पूरे पीरियड के लिए ब्याज लगता है, न कि सिर्फ इस्तेमाल किए गए अमाउंट पर 

पर्सनल लोन के फायदे

  • ओवरड्राफ्ट की तुलना में कम ब्याज दर

  • तय मंथली EMIs की वजह से बजट प्लानिंग आसान होती है

  • ज्यादा बॉरोइंग लिमिट, बड़ी जरूरतों के लिए बेहतर ऑप्शन 

  • लंबे पीरियड की जरूरतों जैसे होम रेनोवेशन या पुराने कर्ज चुकाने के लिए उपयुक्त

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पर्सनल लोन के नुकसान

  • फ्लेक्सिबल नहीं, पूरा लोन EMI में चुकाना पड़ता है

  • पूरे पीरियड के लिए ब्याज देना होता है

  • ओवरड्राफ्ट की तुलना में अप्रूवल में समय लग सकता है

  • कुछ लेंडर्स जल्दी चुकाने या फोरक्लोजर पर फीस लगा सकते हैं

ओवरड्राफ्ट और पर्सनल लोन के बीच मुख्य अंतर

फीचर ओवरड्राफ्ट पर्सनल लोन
लोन टाइप क्रेडिट सुविधा फिक्स लोन
उपयोग जरूरत के अनुसार विड्रॉल एकमुश्त अमाउंट
रिपेमेंट  फ्लेक्सिबल मंथली EMIs
ब्याज दर ज्यादा (9.5% से 40% सालाना तक) कम (8.75% से 36% सालाना तक)
बॉरोइंग लिमिट कम ज्यादा 
इस स्थिति में बेस्ट शॉर्ट-टर्म इमरजेंसी लॉन्ग-टर्म जरूरतें

कब चुनें ओवरड्राफ्ट?

ओवरड्राफ्ट इन परिस्थितियों में मददगार साबित हो सकता है:

  • कम समय के लिए कुछ ही अमाउंट की जरूरत हो

  • रिपेमेंट में फ्लेक्सिबिलिटी चाहिए

  • जरुरी अमाउंट का अंदाजा न हो

  • ब्याज से बचने के लिए जल्दी रिपेमेंट का ऑप्शन हो 

उदाहरण: अगर अचानक मेडिकल बिल आ गया हो या सैलरी आने से पहले कुछ कैश की जरूरत हो, तो ओवरड्राफ्ट एक बढ़िया ऑप्शन है.

कब चुनें पर्सनल लोन?

पर्सनल लोन इन स्थितियों में बेहतर हो सकता है:

  • बड़े अमाउंट की जरूरत हो

  • कम ब्याज दर पर कर्ज चाहिए

  • निश्चित अवधि में रिपेमेंट पसंद हो

  • कोई खर्च या निवेश प्लान किया हो

उदाहरण: घर का रेनोवेशन, शादी का खर्च या पुराना कर्ज चुकाने जैसी जरूरतों के लिए पर्सनल लोन ज्यादा उपयोगी है.

निष्कर्ष

पर्सनल लोन और ओवरड्राफ्ट दोनों ही ऑप्शंस आपको एक्स्ट्रा फंड उपलब्ध कराते हैं. लेकिन कौन सा ऑप्शन सही रहेगा, यह आपकी फाइनेंशियल जरूरतों पर निर्भर करता है. किसी भी ऑप्शन को चुनने से पहले ब्याज दरों, फीस और बैंक की ओर से लगाए जाने वाले दूसरे चार्ज को समझना जरूरी है.

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट के जरिए 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन के कई ऑफर एक्सप्लोर कर सकते हैं. ये लोन 100% पेपरलेस प्रोसेस से दिए जाते हैं और ब्याज दरें सिर्फ 10.5% सालाना से शुरू होती हैं.

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