RBI ने अपर-लेयर NBFCs के लिए तय कर दीं गाइडलाइंस, अब Tata Sons की लिस्टिंग पर सबकी निगाहें

नए नियमों के बाद लगता है कि टाटा संस के प्राइवेट बने रहने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इसके एसेट्स अपर लेयर कैटेगरी में रखी जाने वाली NBFC के लिए नई तय की गई सीमा से कहीं ज्यादा हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अपर लेयर NBFC के लिए व्यापक नियमों की जरूरत है

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 8:35 AM
स्केल बेस्ड रेगुलेशन के तहत NBFCs को NBFC-बेस लेयर, NBFC-मिडिल लेयर, NBFC-अपर लेयर और NBFC-टॉप लेयर में बांटा गया है।

अब 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को 'अपर लेयर NBFC' कैटेगरी में रखा जाएगा। ऐसी कंपनियों की पहचान करने के लिए मौजूदा तरीके की जगह एक आसान और ठोस मानदंड अपनाया जाएगा। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक ने कही है। पहले के फ़्रेमवर्क में, अपर लेयर NBFC की पहचान आकार, इंटरकनेक्टेडनेस और जटिलता पर आधारित स्कोरिंग पद्धति का इस्तेमाल करके की जाती थी। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अपर लेयर NBFC के लिए व्यापक नियमों की जरूरत है।

ऐसी NBFC की पहचान करने के तरीके और सार्वजनिक क्षेत्र की NBFCs को कई लेयर्स में रखने से जुड़े निर्देशों के रिव्यू के आधार पर मौजूदा नियमों में बदलाव की जरूरत है। केंद्रीय बैंक NBFC को उनके आकार, रिस्क प्रोफाइल और प्रणाली के लिए उनकी अहमियत के आधार पर रेगुलेट करता है।

NBFC की कितनी कैटेगरी


स्केल बेस्ड रेगुलेशन के तहत नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को NBFC-बेस लेयर, NBFC-मिडिल लेयर, NBFC-अपर लेयर और NBFC-टॉप लेयर में बांटा गया है। रिजर्व बैंक (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज– रजिस्ट्रेशन, एग्जेंप्शंस एंड फ्रेमवर्क फॉर स्केल बेस्ड रेगुलेशन) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026 के अनुसार, अपर लेयर में वे NBFC शामिल होंगी जिनकी पहचान RBI हर साल खास तौर पर करता है और जिनके लिए अधिक नियमों की जरूरत होती है। अपर लेयर NBFC की पहचान के मानदंडों के बारे में कहा गया, ‘‘अपर लेयर में वे NBFC शामिल होंगी, जिनका एसेट साइज वित्त वर्ष की लेटेस्ट ऑडिटेड बैलेंस शीट के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।’’

आगे कहा गया है कि NBFC-अपर लेयर (यूएल) की पहचान के मानदंड की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही इनकी पहचान के लिए एसेट साइज की सीमा की समीक्षा हर 3 साल में की जानी चाहिए।केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि ऐसी NBFC जो किसी कमर्शियल बैंक की ग्रुप एंटिटी है और अगर कोई खास बिजनेस/गतिविधि NBFC और उसका पेरेंट बैंक दोनों कर रहे हैं, तो ऐसी NBFC को लागू नियमों का पालन करना चाहिए। फिर चाहे वह किसी भी लेयर के तहत आती हो।

Tata Sons के लिस्टिंग से बचने के रास्ते हो गए बंद?

अपर लेयर NBFC पर नए नियमों के बाद अब सबकी नजरें टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस पर होंगी। यह कंपनी एक कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर रजिस्टर्ड है। इसके एसेट्स अपर लेयर कैटेगरी में रखी जाने वाली NBFC के लिए नई तय की गई सीमा से कहीं ज्यादा हैं। टाटा संस को आरबीआई ने 2022 में अपर-लेयर NBFC की लिस्ट में शामिल किया था। नियमों के तहत इसे सितंबर 2025 तक लिस्ट होना था। लेकिन टाटा संस ने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने से बचने के लिए अपना CIC लाइसेंस रद्द करने की अर्जी दी।

अब नए नियमों के बाद लगता है कि टाटा संस के प्राइवेट बने रहने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। ETIG एनालिसिस के मुताबिक, स्टैंडअलोन बेसिस पर कंपनी के एसेट्स लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के हैं।कंसोलिडेटेड मार्केट कैप 300 अरब डॉलर से ज्यादा है।

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