एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने एसबीआई और एचडीएफसी बैंक सहित इंडिया की 10 फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की रेटिंग बढ़ा दी है। इसके एक दिन पहले ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने इंडिया की लॉन्ग टर्म सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई थी। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की रेटिंग में इजाफा उनकी बेहतर वित्तीय सेहत का संकेत है। एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में इन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की रेटिंग बढ़ाने की वजह बताई है।
फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को तेज इकोनॉमिक ग्रोथ का फायदा मिलेगा
S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा है कि इंडिया के फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को देश की तेज इकोनॉमिक ग्रोथ का फायदा मिलेगा। इन इंस्टीट्यूशंस का फोकस घरेलू मार्केट पर है, जिसमें स्ट्रक्चरल इम्प्रूवमेंट्स दिख रहा है। बैड लोन की रिकवरी में इम्प्रूवमेंट है। इसका फायदा इंडिया की वित्तीय कंपनियों और बैंकों को मिलेगा। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने सात बैंकों की रेटिंग बढ़ाई है। इनमें State Bank of India, ICICI Bank, HDFC Bank, Axis Bank Ltd, Kotak Mahindra Bank, Union Bank of India और Indian Bank शामिल हैं।
बैंकों की एसेट क्वालिटी बेहतर बने रहने की उम्मीद
एसएंडपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हमें उम्मीद है कि ये बैंक एसेट क्वालिटी अच्छे लेवल पर बनाए रखेंगे। इकनी प्रॉफिट कमाने की क्षमता भी अच्छी बनी रहेगी। अगले 12-24 महीनों में इनका कैपिटलाइजेशन भी बढ़ेगा। हालांकि, कुछ पॉकेट्स में दबाव है। लेकिन, सिस्टम में क्रेडिट रिस्क घटा है। 14 अगस्त को एसएंडपी ने इंडिया की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई थी। उसने इसे बीबीबी- से बढ़ाकर बीबीबी कर दिया था। उसने 18 साल बाद इंडिया की रेटिंग बढ़ाई थी। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने 14 अगस्त को ओएनजीसी, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, टाटा पावर की रेटिंग भी बढ़ाई थी। इनकी रेटिंग बीबीबी- से बढ़ाकर बीबीबी कर दी थी। आउटलुक स्टेबल किया था।
इंडिया में इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड में भी इम्प्रूवमेंट
कई इंडियन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की रेटिंग का संबंध इंडिया की सॉवरेन रेटिंग से है। इसकी वजह यह है कि सरकार की वित्तीय स्थिति का सीधा असर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं पर पड़ता है। रेटिंग एजेंसी ने इंडिया के इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में इम्प्रूवमेंट की भी बात कही है। इंडिया में आईबीसी की शुरुआत 2016 में हुई थी। उसने कहा है कि आईबीसी की वजह से पेमेंट कल्चर और रूल ऑफ लॉ को बढ़ावा मिला है।